पंचायत के सफाई कर्मचारी गांव की सफाई शुरू करने से पहले स्कूलों में जाकर इन शौचालयों की सफाई करते हैं। ऐसे शौचालयों से बच्चे और ग्रामीण दोनों ‘फील गुड’ महसूस कर रहे हैं।
हमारी पंचायत ने अपनी आमदनी से आठ से नौ लाख रुपये लगाकर उसे मॉडल के रूप में बनाया है। हर उम्र के बच्चों के लिए अलग से यूरिनल है। लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय बने हैं। बाकी पंचायतें भी हमसे कंपटीशन करके बेहतर काम कर सकती हैं। - बबली देवी, प्रधान भुता
50 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने अपना फंड इकट्ठा करके प्राइमरी स्कूलों में इतने शानदार शौचालय बनाए हैं कि ऐसे शौचालय शहरों में नहीं हैं। हम चाहते हैं कि जनपद की सभी 1193 पंचायतें पहल करके कम से एक मॉडल शौचालय बनाकर बरेली को नंबर एक पर लेकर आएं। - विनय कुमार, डीपीआरओ