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Bareilly News: पाषाण और शैल चित्रकला से मिलते हैं मानव सभ्यता के प्रमाण

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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग और इंदिरा गांधी कला केंद्र नई दिल्ली के आदि दृश्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चलायमान प्रदर्शनी ग्लोरियस भीमबेटका : पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल के संग्रह का शुक्रवार को समापन हुआ। विद्यार्थियों को प्रदर्शनी के जरिये मानव सभ्यता के विकास के बारे में जानकारी दी गई।
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प्रधान वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. जगन्नाथ पाल ने बताया कि आठ हजार साल पहले विंध्य क्षेत्र में सबसे पहले मानव सभ्यता के प्रमाण मिले। पाषाण उपकरण और शैल चित्रकला के साथ खेती के भी प्रारंभिक प्रमाण सोन नदी और बेलन नदी घाटी से प्राप्त हुए। ज्वालामुखी की राख के प्रमाण गौहरा पुरास्थल से और कलाकृति के रूप में मातृदेवी के प्रमाण बेलन नदी घाटी से मिले हैं। गुफा चित्रकारी से प्राचीन काल के मानव जीवन का स्वरूप प्रदर्शित होता है। ये चित्र पांचाल संग्रहालय में प्रदर्शित हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकायाध्यक्ष प्रो. एमके सिंह और विभागाध्यक्ष प्रो. विजय बहादुर सिंह ने किया। चलायमान प्रदर्शनी में भीमबेटका के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई।
इस दौरान डॉ. प्रिया सक्सेना, डॉ. पवन कुमार सिंह, प्रो. आशुतोष प्रिय, प्रो. इसरार खान, डॉ. ज्योति पांडेय, डॉ. रामबाबू, डॉ. अनूप रंजन मिश्र, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. कमलेश, शोध छात्र सुदेश, रोशन सिंह, जूही सिंह, ललिता, एमए की छात्रा ईशा, अश्विनी, स्वाति, भूमिका व अन्य मौजूद रहीं।
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