पुलिस ने पहले शिकायत दबाई, फिर क्लीनचिट दी तो कोर्ट चले गए चार विद्यार्थी
तय सीटों से ज्यादा लिए थे प्रवेश, पचास से ज्यादा छात्रों की फर्जी परीक्षा भी करा दी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। डीफार्मा की फर्जी डिग्री देने वाला शेर अली जाफरी धोखाधड़ी का पुराना मास्टमाइंड है। दस साल पहले बीए में उसने निर्धारित सीटों से ज्यादा प्रवेश लेकर वसूली कर ली थी। रिजल्ट फंसने पर धोखाधड़ी का पता लगा तो पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। कोर्ट के आदेश पर दर्ज मामले में भी खेल कर दिया। अब भी मामले में गवाही की तारीखें पड़ रही हैं।
जाफरी कई साल पहले से रुहेलखंड विवि से मान्यता लेकर अपने खुसरो डिग्री कॉलेज में बीए व अन्य कोर्स संचालित रहा है। प्रारंभिक दौर में उसने बीए की सामान्य डिग्री देने में भी फर्जीवाड़ा किया था। सत्र 2012-13 में जाफरी ने बीए प्रथम वर्ष में विवि से आवंटित सीटों से करीब 50 प्रवेश ज्यादा ले लिए। इनसे सारी फीस खुद ही वसूल ली। जुगाड़ से सभी की परीक्षा भी करा दी। परीक्षाफल जारी हुआ तो यह फर्जीवाड़ा खुल गया। पीड़ित विद्यार्थी रुहेलखंड विवि पहुंचे तो पता लगा कि वहां उनका नामांकन ही नहीं है और प्रवेश से लेकर परीक्षा तक फर्जी दिलाई गई।
सीबीगंज पुलिस ने थाने से भगा दिया था
धोखाधड़ी के शिकार ज्यादातर छात्रों ने कॉलेज में नाराजगी जताकर ही शांत हो गए। तीन छात्र मोहम्मद मुशर्रफ, राम सिंह, सलमान व एक छात्रा प्रभा मौर्या ने सीबीगंज थाने जाकर जाफरी के खिलाफ तहरीर दी। पीड़ितों के मुताबिक थाने में जाफरी का सिक्का चलता था। पुलिस ने उनको थाने से भगा दिया था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर जाफरी व तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अतुल नामदेव पर रिपोर्ट दर्ज की गई।
विवेचक ने जाफरी को कर दिया था बरी
छात्रों का आरोप है कि मुकदमे के विवेचक एसआई केएम गुप्ता ने सत्ताधारी पार्टी से जुड़े जाफरी का नाम हटाकर केवल प्राचार्य के खिलाफ चार्जशीट लगा दी। तब छात्रों ने कोर्ट में अपील डाल दी। स्थानीय कोर्ट ने जाफरी का नाम जोड़ा तो वह हाईकोर्ट चला गया। छात्रों के मुताबिक वहां से उसे कुछ राहत मिल गई पर प्राचार्य पर आरोप बरकरार रहा। अब भी एसीजेएम टू कोर्ट में इसकी तारीखें पड़ रही हैं। दस सितंबर को तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अतुल नामदेव ने कोर्ट में हाजिरी दी थी।
दस साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे लोग हताश
हरियाणा की एक कंपनी में बॉयलर इंजीनियर मोहम्मद मुशर्रफ ने बताया कि धोखा खाने के बाद उन्होंने बीए की पढ़ाई का मोह छोड़कर डिप्लोमा कर लिया और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आ गए। उनके साथ मुकदमा दर्ज कराने वाले सलमान रेलवे में कोच अटेंडेंट हैं। राम सिंह प्राइवेट ड्राइविंग करते हैं और प्रभा शादी के बाद परिवार में व्यस्त हो गई हैं। बताया कि उन चारों लोगों को लगातार हताशा मिल रही है पर अभी हौसला नहीं छोड़ा है। उन्हें लगता है कि एक दिन उनके मामले में भी कोर्ट जाफरी पर कार्रवाई करेगा।