अपने ही लोगों का उड़ाया था मजाक, अब चंदा लेने वाले नेताओं ने ब्लॉक कर दिए नंबर
बरेली। शेर अली जाफरी पर कार्रवाई के बाद उसकी बिरादरी खासतौर से गरीब तबके के लोगों में खुशी का आलम है। जाफरी ने खुसरो सेना नाम से पार्टी बनाकर नारा दिया था कि गरीब उनकी पार्टी से दूर रहें। जाफरी ने ठगी की कमाई का बड़ा हिस्सा नेताओं की सेवा में लगाया, अब उन्हीं नेताओं ने उससे व उसके परिवार से कन्नी काट ली है।
379 विद्यार्थियों से 3.69 करोड़ की ठगी कर डीफार्मा की फर्जी डिग्री बांटने के मामले में एसआईटी ने भाजपा नेता शेर अली जाफरी व उसके बेटे फिरोज जाफरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शाह अल्वी बिरादरी के गरीब परिवार से जुड़े जाफरी पर जब धनवर्षा हुई तो वह अपने समाज व गरीब लोगों को भूल गया। सत्ता के रथ पर सवार होकर व स्थानीय पुलिस से सेटिंग करके जाफरी फर्श से अर्श पर पहुंच गया। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने और अपनी पार्टी के प्रत्याशियों का चुनाव में बुरा हश्र देखकर जाफरी ने तुरंत यूटर्न ले लिया और सत्ता से जुड़ गया।
स्टाफ का वेतन काटने में कुख्यात है आरोपी
शेर अली जाफरी शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन देने में कंजूसी बरतता था। ऐसे कई लोग अब सामने आ रहे हैं जो जाफरी के कॉलेज या अस्पताल में काम कर चुके हैं। उनमें से अधिकतर लोग संबंध खराब होने के बाद ही संस्थान से निकले और उनका कुछ माह का वेतन या अन्य देय जाफरी ने रुकवा दिए। कई बार तगड़ी सिफारिश पर जाफरी कुछेक स्टाफ को वेतन दे देता था।
प्रवेश कराने पर देता था मोटा कमीशन
कॉलेज में एडमिशन कराने के नाम पर शेर अली जाफरी स्टाफ को मोटा कमीशन देता था। उसने कर्मचारियों व शिक्षकों से स्पष्ट कह रखा था कि जो जितने एडमिशन कराएगा, उसे उतना ही लाभ मिलेगा। इस लालच में कर्मचारियों ने तमाम एडमिशन कराए। धोखाधड़ी के शिकार छात्र बाद में उन परिचित कर्मचारियों के सिर पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि ठगी के शिकार हुए कई छात्र भी जाफरी के चंगुल में फंसकर उसके लिए कमीशन एजेंट के तौर पर काम करने लगे थे। अमर उजाला ब्यूरो