बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल मरीजों को इलाज मुहैया कराने के बजाय शासन से जारी करोड़ों रुपये का बजट ठिकाने लगाने का जरिया बन कर रह गया है। चार साल से यहां करोड़ों के उपकरण जंग खा रहे हैं। प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में इनका एक दिन भी संचालन नहीं हुआ। इस बीच इनकी गारंटी-वारंटी भी खत्म हो गई। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की पड़ताल में यही हकीकत सामने आई।
भूतल पर बने हॉल में वर्ष 2022 में खरीदे करीब आठ करोड़ रुपये के उपकरण रखे हैं। कांच के दरवाजे को अंदर से कपड़ा लगाकर बंद किया गया है ताकि बाहर से देखने वालों को इसके बारे में पता न चले। प्रथम तल पर ड्रग स्टोर के केबिन में रखे बेड और स्ट्रेचर जंग खा रहे हैं। द्वितीय तल पर भी तमाम उपकरण ताले में बंद हैं। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले भी देहात के स्वास्थ्य केंद्रों के लिए संसाधन ट्रक में भरकर आए और यहां उतारकर कक्षों में रख दिए गए।
कोरोना महामारी के दौरान पीएम केयर फंड से करीब 20 करोड़ के उपकरण मुहैया कराए गए थे। इसमें 33 वेंटिलेटर बेड, 50 सेमी फोलर बेड, 50 बेड साइड लाकर, 50 एटेंडेंट बेंच, 25 बीपी टेबल माॅडल, 25 व्यू बाॅक्स सिंगल फिल्म डबल ट्यूब, 25 स्टेथोस्कोप, 25 डिजिटल थर्मामीटर, 25 वेटिंग चेयर, 25 टेबल, 25 एग्जीक्यूटिव चेयर, 25 अलमारी, रेटिनोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज मशीन, हाॅट एयर ओवन डिजिटल, इंक्यूबेटर, हीमोग्लोबिन मीटर डिजिटल, पांच आईसीसीयू बेड, पांच सक्शन मशीन हाई वैक्यूम, 15 ऑक्सीजन सिलिंडर बी टाइप, दो इंफ्यूजन पंप, पांच बेड साइड मानीटर, पांच मल्टी पैरामॉनिटर, दो डिजिटल ईसीजी मशीन, एक्सरे मोबाइल प्रोटेक्टिव चेयर लेड लाइन, हाॅरिजेंटल हाई प्रेशर स्टीम स्टेरिलाइजर, क्लोज नेलिंग इंस्ट्रूमेंट समेत अन्य उपकरण शामिल हैं। सभी धूल फांक रहे हैं। एलाइजा रीडर, सीबीसी, डिजिटल एक्सरे मशीन आदि स्टोर में ही पड़ी रहीं। अस्पताल का निर्माण 2018-19 में पूरा हुआ। 2020 में कोरोना की स्क्रीनिंग शुरू हुई।
जिला अस्पताल की मेडिसिन, नेत्र, दंत, त्वचा रोग, एआरवी की ओपीडी यहां शिफ्ट हुई। हालांकि, अस्पताल आज भी आधी-अधूरी सुविधाओं के साथ घिसट रहा है। ब्यूरो