बरेली। शहर में बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए विभिन्न योजनाओं से 400 करोड़ के काम कराए जा रहे हैं। 2024-25 के यह काम मार्च के पहले सप्ताह तक पूरे करने का लक्ष्य है। अब तक बमुश्किल 75 फीसदी काम ही हो सके हैं। इस बीच बिजली निगम ने 2025-26 के लिए योजना तैयार कर ली है। शहर में 65 करोड़ की लागत से सुधार के काम कराए जाएंगे।
गर्मियों के सीजन में शहर में बिजली आपूर्ति का बुरा हाल रहता है। पिछले साल पूरे सीजन बिजली कटौती को लेकर हायतौबा मची रही। बिजली उपकेंद्रों के घेराव और कर्मचारियों से मारपीट से लेकर डीएम आवास तक का घेराव किया गया। अधिकारी दावा करते रहे कि व्यवस्था में जल्द सुधार होगा। अक्तूबर से तापमान में कमी आने के साथ शहर में विभिन्न योजनाओं तहत काम शुरू करा दिए गए। शहर में बिजली आपूर्ति देने वाले सभी 25 बिजली उपकेंद्रों के इलाकों में अब तक काम पूरे नहीं हो सके हैं। इस बीच नए काम कराने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
शहर में 35 स्थानों पर नए ट्रांसफार्मर लगाने के साथ 110 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर 11 केवी अंडरग्राउंड लाइन डालने और बिजली के खंभे लगाने का काम किया जाएगा। बिजनेश प्लान 2025-25 में नए लगाए जाने वाले ट्रांसफार्मरों के चारों ओर सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाने का काम भी शामिल है। नए कार्यों के लिए एस्टीमेट बनाकर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय भेज दिया गया है।
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सुभाषनगर में नहीं मिली जमीन, पवन विहार में बिजली उपकेंद्र लगभग पूरा
बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए शहर में चार बिजली उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। इनमें पवन विहार में ही बिजली उपकेंद्र का काम शुरू हो सका है। यहां काम लगभग पूरा हो गया है। साउथ सिटी में 220 केवी बिजली उपकेंद्र का काम भी पूरा हो चुका है। यहां से मढ़ीनाथ, सुभाषनगर, किला और सराय तल्फी उपकेंद्रों के लिए 33 केवी भूमिगत लाइन डालने का काम चल रहा है। दूसरी ओर सुभाषनगर में प्रस्तावित बिजली उपकेंद्र के लिए भूमि ही नहींं मिल सकी है। ऐसे में सुभाषनगर के इलाकों से जुड़े लोगों को इस सीजन भी कटौती से जूझाना होगा।
बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए शहर में 35 स्थानों पर नए ट्रांसफार्मर लाने के साथ 110 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जानी है। आने वाले दिनों में बिजली की खपत बढ़ने से ओवरलोडिंग की समस्या नहीं होगी। पांच किलोमीटर अंडरग्राउंड लाइन का काम भी होना है। इस पर 65 करोड़ खर्च होंगे।- सुरेंद्र गौतम, अधिशासी अभियंता
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