परिवार के साथ विशेष सैलून से आते थे
चुनाव के दौरान नवाब साहब अपने विशेष सैलून से रामपुर से आंवला आते थे। मालगोदाम के शेड में उनका सैलून खड़ा रहता था। आंवला कस्बे में उनके ठहरने की कोई उचित व्यवस्था नहीं हो पाती थी, लिहाजा वह परिवार सहित तीन दिनों तक सैलून में ही रहते थे। बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय इलाके के कुछ खास रसूखदार लोगों को बुलाकर बता दिया जाता था कि नवाब साहब के दामाद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। सबको उन्हीं के पक्ष में मतदान करना है।
नवाब साहब को गुफरान अहमद के मकान से मकबरे तक जाने के लिए कालीन का इंतजाम न होने पर टूल (लाल कपड़ा) बिछाया जाता था। इस कपड़े का इंतजाम कस्बे के दुकानदार खुद ही करते थे। नवाब परिवार के लोग अपने पूर्वजों के मकबरे तक जरूर जाते थे।