नवाबगंज। पिछले कई माह से चल रहे एडवोकेट प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन कार्यकारिणी के चुनाव पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने अपना आदेश जारी करते हुए अधिवक्ताओं में खलबली पैदा कर दी है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने जारी किए गए अपने आदेशों में चुनाव प्रक्रिया को मॉडल बायलॉज के विपरीत बताते हुए वरिष्ठ सदस्यों की कमेटी बनाए जाने के साथ ही सीपीओ आवंटित अधिवक्ताओं की सूची बनाए जाने के आदेश दिए हैं।
एडवोकेट प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन कार्यकारिणी का 30 मई को चुनाव होना था। इसको लेकर प्रत्याशियों द्वारा अपने अधिवक्ता साथियों से लगातार जनसंपर्क किया जा रहा था। इतना ही नहीं बड़े पैमाने पर जलपान भी कराया जा रहा था, लेकिन एकाएक चुनाव पर रोक लग जाने से अधिवक्ता खासे मायूस नजर आ रहे हैं।
संगठन के पूर्व अध्यक्ष रवींद्र पाल सिंह गंगवार द्वारा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष को की गई शिकायत में नवाबगंज प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन द्वारा बिना सीपीओ धारक अधिवक्ताओं का नाम सम्मिलित कर लिए जाने, मॉडल बायलॉज के विपरीत चुनाव कराए जाने आदि के लिए शिकायत की थी, जिस पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने इसे गंभीरता से लेते हुए संगठन को पत्र भेजा है।
बार काउंसिल द्वारा भेजे गए अपने आदेशों में सीनियर पांच अधिवक्ताओं की एल्डर कमेटी गठित करने और सबसे सीनियर अधिवक्ता को इसका चेयरमैन बनाए जाने के बाद नई मतदाता सूची बनाए जाने के आदेश दिए हैं। सूची में सीपीओधारक अधिवक्ताओं के नाम शामिल करने के आदेश दिए हैं। संवाद