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एनसीआर में प्रभावी बरेली में कमअसर

Sun, 14 Jan 2018 01:55 AM IST
बरेली
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बगैर अनुमति शहरवासियों की नींद हराम कर रहे धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों को बंद कराने का सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश सरकार के जरिये पूरे सूबे में पहुंचा है, लेकिन बरेली के ‘सिस्टम’ ने इसे उतना महत्व नहीं दिया, जितना सूबे के दूसरे शहरों में हुआ है। एनसीआर के साथ नोएडा, गाजियाबाद समेत तमाम शहरों में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतर चुके हैं, लेकिन बरेली का प्रशासन अभी तक धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की गिनती करने में ही जुटा है। यह स्थिति तब है, जब अधिकारियों को 20 जनवरी को शासन को अपनी कार्रवाई के बारे में जवाब भेजना है। 
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अमर उजाला की टीम ने शनिवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघरों में जाकर लाउडस्पीकरों की स्थिति का जायजा लिया। कई धर्मस्थलों पर एक-दो नहीं बल्कि छह-छह लाउडस्पीकर टंगे नजर आए। बातचीत की तो आसपास रहने वालों का दर्द भी छलका। धर्म का मामला होने की वजह से तमाम दिक्कतें होने के बावजूद अपने होठों को बंद रखने वाले ये लोग अब शासन के आदेश पर चल रही कार्रवाई को लेकर कुछ आशान्वित नजर आए तो प्रशासन की धीमी रफ्तार को लेकर उनमें कुछ बेचैनी भी झलकी। कोई भी धर्मस्थल हो, उसके आसपास रहने वाले ज्यादातर लोगों ने समर्थन किया कि लाउडस्पीकरों की जरिये उन्हें दी जा रही यातना से हर हालत में मुक्ति मिलनी ही चाहिए। प्रस्तुत है शहर की स्थिति की लाइव रिपोर्ट। -

 
फोटो--
समय : 11.30 बजे
चौकी चौराहा मस्जिद
चौकी चौराहे की मस्जिद पर चार लाउडस्पीकर लगे थे। यह कब बजते हैं, कब नहीं। इस पर मस्जिद से निकले लोग नहीं बोले। इतना जरूर कहा कि लाउडस्पीकर की आवाज तेज नहीं होती। फिर भी अगर न्यायालय ने धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर बजने पर रोक लगाई है, तो उसका पालन हो। 
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फोटो--
समय  : 11.45
कचहरी मस्जिद
इमाम मोहम्मद आजाद ने बताया कि छह लाउडस्पीकर लगे हैं, लेकिन वह तेज नहीं बजते। सुबह या शाम अजान के समय बजते हैं। प्रशासन से लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति है या नहीं, इस पर इमाम का कहना था कि अनुमति की कभी जरूरत नहीं पड़ी। अब आवेदन किया है।  
फोटो--राशिद 
मस्जिद के पड़ोस में रहने वाले राशिद कचहरी में पेशे से टाइपिस्ट हैं। इनका कहना है कि धार्मिक स्थल कोई भी हो, लाउडस्पीकर प्रशासन की अनुमति से और धीमी आवाज में बजें ताकि दूसरों को दिक्कत न हो। कोर्ट के आदेश का पालन होना चाहिए। 

फोटो-
समय : 12 बजे दोपहर
सिविल लाइंस हनुमान मंदिर 
 मंदिर के ऊपर एक लाउडस्पीकर था, जो कि बंद था। पुजारी ने बताया कि लाउडस्पीकर से सुबह या शाम को केवल आरती होती है। हालांकि आसपास के व्यापारियों का कहना था कि तेज आवाज से सब डिस्टर्ब रहते हैं, लेकिन मामला धार्मिक होने की वजह से वह कुछ कह नहीं पाते। 

फोटो-
सिविल लाइंस के कपड़ा व्यापारी विनीत अग्रवाल का कहना है कि मंदिर का लाउडस्पीकर सुबह या शाम आरती के समय ही बजता है, लेकिन इसकी आवाज धीमी होनी चाहिए क्योंकि पूजा या आरती जरूरी नहीं कि सबको बताकर की जाए। श्रद्धा हो तो बिना लाउडस्पीकर के भी आरती हो सकती है।  

 फोटो--
समय : 12.15 बजे 
कुतुबखाना मस्जिद :
मस्जिद पर चार-चार के ग्रुप में दो जगह आठ लाउडस्पीकर लगे थे। इनकी आवाज आस-पास इलाकों में सुबह चार बजे से ही गूंजने लगती है। शाम को भी लाउडस्पीकर की आवाज से दुकानदारों को दिक्कत होती है। लोगों का कहना था कि मामला धार्मिक होने की वजह से वह कुछ कह नहीं पाते। 
फोटो-
शिवाजी मार्ग पर रहने वाले सराफा व्यापारी कौशल अग्रवाल का कहना था कि मंदिर हों या मस्जिद। लाउडस्पीकर रात में तीन बजे ही बजने शुरू हो जाते हैं। दिन में भी पता नहीं कब बजने लगें। शाम को भी लाउडस्पीकर की आवाज से बच्चे पढ़ नहीं पाते। 

फोटो--
समय - 12.30 बजे
बाबा अलखनाथ मंदिर 
अलखनाथ मंदिर का परिसर 96 बीघे का बताया जाता है। अभी पूरे परिसर में 10 लाउडस्पीकर लगे हैं। सुबह और शाम को इन लाउडस्पीकरों से ही देवी देवताओं की आरती होती है। हालांकि यह शहर के बाहर का इलाका है, फिर भी इन लाउडस्पीकरों की आवाज दूर तक जाती है। 
फोटो--
श्रीमहंत लक्ष्मण भारती का कहना है कि बाबा अलखनाथ मंदिर शहर से बाहर जंगल में है। मंदिर के लाउडस्पीकरों पर कभी किसी ने आपत्ति नहीं की। वह प्रशासन से 15 लाउस्पीकर लगाने की अनुमति मांगने आए हैं क्योंकि वहां सब देवी देवताओं के मंदिर हैं। हर एक में एक लाउडस्पीकर लगना चाहिए।



फोटो--
समय दोपहर 12:45
 मेथोडिस्ट चर्च : 
सिविल लाइंस में चर्च के ऊपर लाउडस्पीकर नहीं लगा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि चर्च रोज नहीं खुलता है। प्रत्येक रविवार को प्रार्थना के समय साउंड सिस्टम चलाकर या कभी-कभी उसके बिना ही मॉर्निंग सर्विस होती है। अगर किसी की शादी होनी होती है, तब चर्च खोल दिया जाता है।   
 समय दोपहर 01:30
सेंट माइकल चर्च : 
सेंट माइकल एंड ऑल एंजिल्स चर्च पर लाउडस्पीकर लगा था। पादरी अमन अभिषेक प्रसाद ने बताया कि चार साल से नहीं बज रहा है। उन्होेंने कहा कि कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। हमारा पूरा सहयोग रहेगा। तेज आवाज और प्रतिबंधित समय में लाउडस्पीकर बिल्कुल नहीं बजना चाहिए। 
  फोटो:
समय 02:00 बजे 
गुरुद्वारा मॉडल टाउन : 
स्थानीय लोगों ने बताया कि गुरुद्वारे का लाउडस्पीकर खास प्रोग्राम पर ही बजता है। रोजाना नहीं। मुख्य ग्रंथी निशान सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा के अंदर साउंड बाक्स धीमी आवाज में बजाए जाते हैं, जिनकी आवाज बाहर नहीं जाती। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर न बजाने का फैसला सबके हित में है। 

फोटो--
समय- 2.15 बजे
सिविल लाइंस गुरुद्वारा : 
हेड ग्रंथी काला सिंह ने बताया कि लाउडस्पीकर किसी आयोजन या पर्व पर ही बजता है। आम दिनों में छोटे साउंड सिस्टम बजते हैं। प्रार्थना की आवाज बाहर नहीं जाती। रात में 10 से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर न बजाने का फैसला पूरी तरह ठीक है। 


फोटो: 
समय : दोपहर तीन बजे
मस्जिद कलंदर शाह, श्यामगंज
मस्जिद की दो मीनारों पर आठ लाउडस्पीकर लगे थे। मौलाना मुशर्रफ रजा बोले, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या टिप्पणी करें? मगर आवाज तो धीमी होनी ही चाहिए। लाउडस्पीकर बजाने की अनु़मति के लिए आवेदन कर दिया है, पुलिस वाले भी आकर डिटेल ले गए हैं।
फोटो--
पड़ोस में रहने वाले नवी अहमद का मानना था कि बच्चे हों या बुजुर्ग, शोर मचने से तो सभी को परेशानी होती है। सुप्रीम कोर्ट का अच्छा फैसला है। आवाज तो कम होनी ही चाहिए। 
फोटो-- 
आमिर के अनुसार न्यायालय का यह निर्णय सही है। कोई भी धर्म किसी को तकलीफ देने की इजाजत नहीं देता। लाउडस्पीकर की तेज आवाज तो सभी को परेशान करती है। उसे धीमा करने में खराबी नहीं है। 

समय : 3.15 बजे
मस्जिद रंगरेजान, रबड़ी टोला
चार लाउडस्पीकर लगे थे। मौलाना कमालुद्दीन बोले, लाउडस्पीकर में आवाज कम ही रहती है। कभी किसी ने आपत्ति नहीं उठाई। मुतवल्ली आरिफ ने अनुमति लेने के लिए आवेदन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए बोले- रात को लाउडस्पीकर बजने से ज्यादा मुश्किल होती है।
फोटो-
नसीम खान का कहना था कि नियम तो सभी के लिए है किसी एक के लिए थोड़ी है। तेज आवाज सबको परेशान करती है। इस पर नियंत्रण जरूरी है।
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 सूफी नूर हसन का मानना था कि देर रात तक लाउडस्पीकर बजने पर बिल्कुल ही पाबंदी लगा दी जाए। रात 12 बजे के बाद जो भी लाउडस्पीकर बजाते मिलें, उन पर कार्रवाई हो।


समय : 3.30 बजे
कैथ वाली मस्जिद, काजी टोला
मस्जिद में मिले लोगों ने बताया कि मुतवल्ली हाजी नाजिम ने लाउडस्पीकर की अनुमति के लिए आवेदन कर दिया है। यहां भी चार लाउडस्पीकर लगे थे। एक लाउडस्पीकर अलग से लगा दिखा तो लोगों ने बताया टूटी खिड़की में बंदर न घुसें इसलिए रख दिया है, बजता नहीं है।
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पड़ोस में रहने वाले आरिफ खान का कहना था कि तय सीमा से तेज आवाज के साथ ही लाउडस्पीकर बजाने के लिए समय भी निर्धारित किया जाए। देर रात तक नहीं बजाना चाहिए।
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मोहम्मद आसिफ का मानना था कि देर रात तक लाउडस्पीकर बजाने से बच्चों की बढ़ाई डिस्टर्ब होती। बुजुर्ग और मरीज भी परेशान होते हैं, अंकुश जरूरी है।

समय : 3.45 बजे
मस्जिद हबीबिया रजविया, सैलानी
मुतवल्ली जीलानी कुरैशी ने बताया कि मस्जिद में 12 लाउडस्पीकर लगे हैं। इनकी अनुमति के लिए आवेदन कर दिया है। बोले, लाउडस्पीकर बजाने का समय तो तय होना ही चाहिए। रात में 10-11 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजने चाहिए। प्रोग्राम है, तो वह हॉल में करे। लाउडस्पीकर बंद कर दें।
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 शुएब रजा का कहना था कि रात भर लाउडस्पीकर बजाकर होने वाले आयोजन पर सख्त पाबंदी लगे। इनका टाइम टेबल तय कर देना चाहिए।
फोटो-
 निजाम के अनुसार धर्म कहता है कि आपकी वजह से किसी को परेशानी न हो। लाउडस्पीकर सबसे ज्यादा जुलूस परेशान करते हैं। उन पर भी पाबंदी होनी चाहिए।

 समय : 4.05 बजे
 वनखंडीनाथ मंदिर, जोगीनवादा
महंत कुमारानंद ने बताया कि उनके यहां चार लाउडस्पीकर लगे हैं। पुलिस वाले नोट कर ले गए हैं लेकिन अनुमति को आवेदन नहीं किया है। बोले, सुबह और शाम चार से सात बजे के बाद लाउडस्पीकर पर पाबंदी होनी चाहिए। बोले- मंदिर के लाउडस्पीकर की आवाज बाहर नहीं जाती। 
फोटो--
पड़ोस में रहने वाले सम्राट अशोक ने बताया कि लाउडस्पीकर की आवाज कम होती है, तो दिक्कत नहीं होती लेकिन कई बार आवाज बढ़ा दी जाती है। इसके चलते पढ़ाई डिस्टर्ब होती है।
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 जद्दू सिंह का मानना था कि ज्यादा शोर-शराबे से बच्चों की पढ़ाई हो या बुजुर्ग सभी परेशान होते हैं। लाउडस्पीकर बजाने का समय तय होना बहुत जरूरी है।

 समय : 4.20 बजे
छोटा काली मंदिर, जोगीनवादा
पुजारी महेश शुक्ला की पत्नी चंपा देवी ने बताया दो लाउडस्पीकर हैं। धीमी आवाज में एक लाउडस्पीकर बज भी रहा था। लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति को आवेदन करने के संबंध में कोई भी जानकारी न होने की बात कही।
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पड़ोस में रहने वाले बबलू का कहना था कि मंदिर पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर नहीं बजता है इसलिए कोई परेशानी नहीं होती लेकिन तेज बजाने पर रोक लगनी चाहिए।
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पड़ोसी राकेश का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के असर से लाउडस्पीकर की आवाज कम हुई है। इस पर पूरा अंकुश लगना जरूरी है।

 समय : 4.30 बजे
नौ देवी मंदिर, चक महमूद
महंत संतोष पुरी ने बताया कि उनके यहां दो लाउडस्पीकर लगे हैं। अब तक अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया है। बोले, कार्यक्रम के लिए ऐसा समय तय हो जिससे दूसरों को परेशानी न हो। धर्म के विरुद्ध जाकर ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे दूसरों को परेशानी हो।
फोटो--
पड़ोसी रामदयाल वर्मा का मानना था कि अच्छा निर्णय है, लाउडस्पीकर की आवाज तो बहुत तेज नहीं होनी चाहिए। इसकी वजह से बच्चे हों या बुजुर्ग सभी परेशान होते हैं।
 फोटो- 
दूसरे पड़ोसी रामकिशोर के अनुसार अनुमति लेकर लाउडस्पीकर बजाने से मनमानी पर लगाम लग जाएगी। अभी तो लोग जितना मन हो, उतना तेज बजाते हैं।

समय : 4.40 बजे
मौर्य मंदिर, कटरा चांद खां
मंदिर कमेटी के सदस्य सियाराम ने बताया कि उनके यहां सिर्फ दो लाउडस्पीकर लगे हैं। सुबह शाम ही बजाते हैं, देर रात तक वह भी नहीं। आवाज भी तेज नहीं होती इसलिए कभी कोई आपत्ति भी नहीं आई। चीता मोबाइल वाले आकर डिटेल ले गए हैं लेकिन अभी अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया है।
फोटो--
पड़ोसी  चिम्मनलाल के अनुसार आवाज इतनी हो कि समाज में किसी को भी उससे परेशानी न हो। कई बार इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब होती है।
फोटो--
विक्की का कहना था कि लाउडस्पीकर की आवाज नियंत्रित होनी जरूरी है। आरती और नमाज के लिए छूट होनी चाहिए। बाकी जुलूस आदि पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।  

टीम चार :--
(सिर्फ मोहम्मद रजी का फोटो नहीं है वो खिचाते नहीं है।)
फोटो--
 मलूकपुर की नाले वाले मस्जिद जो अब मुफ्ती आजम हिंद के नाम से जानी जाती है। इसके मुतवल्ली इस्लाम मियां ने बताया कि इस मस्जिद में 6 लाउड स्पीकर हैं। पांच वक्त की आजान और जुमे की नमाज में तकरीर लाउडस्पीकर से होती है। परमीशन के लिए फार्म ले आएं है रविवार को आवेदन करेंगे। 
फोटो--
 मोहल्ले के सय्यद रजब अली का कहना है कि वैसे तो मस्जिद के आस पास तो क्या पूरा मोहल्ला ही मुस्लिम आबादी का है। इस लिए कभी किसी को लाउडस्पीकर पर आजान से कोई एतराज नहीं हुआ। 


फोटो--पम्मी वारसी 
-  खन्नू मोहल्ला की दादा मियां मस्जिद मिश्रित आबादी में है। इसमें मुतवल्ली मोहम्मद रजी ने लाउडस्पीकर की परमीशन के लिए आवेदन कर दिया है। इस मस्जिद में 4 लाउडस्पीकर लगे हैं। इस पर पांच वक्त की आजान के अलावा जुमे की नमाज में 10-15 मिनट की तकरीर होती है। पम्मी खां वारसी का कहना है कि यह बहुत सौहार्द का इलाका है। यहां हिंदू मुस्लिम सभी रहते हैं मगर कभी लाउडस्पीकर पर आजान से किसी को कोई परेशनानी नहीं रहती। 

फोटो--
ॎ मलूकपुर तलैया स्थित पुर्बियान मस्जिद के मुतवल्ली हाजी मोनिस इरशाद ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार मस्जिद में लाउडस्पीकर पर आजान के लिए अनुमति फार्म भर कर जमा कर दिया है। मस्जिद में 4 लाउडस्पीकर हैं, जिससे पांच वक्त की अजान के अलावा रमजान में इस्तेमाल होता है। 
फोटो--
- मोहल्ला निवासी मोहम्मद आसिफ का कहना है कि मस्जिद की आजान हद से हद दो मिनट की होती है। इस पर किसी कोई एतराज नहीं है न होने की उम्मीद है। वैसे कभी ऐसी बात सामने नहीं आई।  
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