बरेली कॉलेज से दो कॉपियां गायब होने के पीछे अब यह चर्चा में है कि समाजवादी छात्र सभा के नेता के अलावा एक और परीक्षार्थी की कापी भी लिखी जानी थी। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह कापी लिखी भी गई थी, लेकिन दूसरे परीक्षार्थी तक पहुंच नहीं सकी, इसलिए वह पकड़ में नहीं आ पाई। समझा जा रहा है कि जांच कमेटी सही से पड़ताल करती है तो दूसरे परीक्षार्थी की पोल भी खुल सकती है। ऐसे में सछास नेता के लिए कापी लिखकर आने के प्रकरण में नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है, क्योंकि ऐसा हुआ तो इस प्रकरण में कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने होगी।
कॉलेज सूत्रों ने बताया कि 24 मार्च को दोपहर की पाली से जो दो कापियां चुराई गई थीं, उसके पीछे सिर्फ समाजवादी छात्रसभा के पूर्व प्रदेश सचिव विक्रम सिंह गंगवार का पेपर ही लिखने का मकसद नहीं था। एक और परीक्षार्थी की भी दूसरी कापी लिखी जानी थी। परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर आउट कर ये दोनों कापियां सॉल्वर से लिखवा ली गई थीं। कॉलेज के अंदर के ही विक्रम के सहयोगी उस तक कापी पहुंचाने में कामयाब हो गए, लेकिन दूसरी कापी उस परीक्षार्थी तक नहीं पहुंचाई जा सकी। वजह यह भी समझी जा रही है कि दूसरी परीक्षार्थी विक्रम की तरह बार-बार बाहर आ-जा नहीं सकी। यदि उस तक कापी पहुंच जाती तो उस परीक्षार्थी का मामला भी सामने आ जाता। जांच कमेटी भी मान रही है कि इस पूरे खेल में कॉलेज के ही लोग शामिल हैं और वे कौन हैं, यही जांच होनी है। फिलहाल, जांच कमेटी ने केमिस्ट्री विभाग के जिन दो शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, उन्हें शनिवार को अपना जवाब दाखिल करना है। जांच कमेटी के अध्यक्ष डॉ. डीके गुप्ता के मुताबिक, जिस कक्ष से दोनों कापियां गायब हुईं, उसमें अनुज गंगवार और जय प्रकाश गंगवार की ड्यूटी थी। अब इनके बयान पर ही जांच की आगे की दिशा तय होगी। हालांकि, इनके पक्ष आने के बाद कमेटी परीक्षार्थी विक्रम को भी जवाब दाखिल करने के लिए बुलाएगी।
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विवि भी करा सकता है जांच
बरेली कॉलेज से 30 मार्च को केमिस्ट्री का पेपर आउट होने और सछास नेता के लिए बाहर से कापी लिखकर आने के मामले में फिलहाल रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन को कॉलेज प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार है। कुलसचिव एके सिंह की ओर से प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव को नोटिस भेजे जाने के बाद भी रिपोर्ट अब तक नहीं भेजी जा सकी है। प्राचार्य का कहना है कि जब कॉलेज की जांच पूरी हो जाएगी, तब विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे। इसमें अभी कुछ दिन और लग सकते हैं, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय रिपोर्ट का इंतजार करने को अब तैयार नहीं है। ऐसे में कुलसचिव ने विश्वविद्यालय की कमेटी बनाकर मामले की जांच खुद कराने के संकेत दिए हैं।