बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सोमवार को विद्या परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नर्सिंग कोर्स और बीबीए कोर्स को शुरू करने समेत विभिन्न कोर्सों के पाठ्यक्रम संशोधन प्रस्तावों को भी पास कर दिया गया। पीएचडी कोर्स में आरडीसी के समय को भी जोड़े जाने और छात्रों की विभिन्न समस्याओं के समाधान पर भी सहमति बनी। इन प्रस्तावों को अब कार्य परिषद की बैठक में रखा जाएगा। यहां से पास होने पर प्रस्तावों को मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में आयोजित विद्या परिषद की इस बैठक में सबसे पहले विभिन्न विषयों से एप्लाइड शब्द हटाने को लेकर सहमति बनी। खासकर विज्ञान विषय जैसे गणित, कैमेस्ट्री आदि विषयों से एप्लाइड शब्द को हटाने पर सहमति बनी। बैठक में विश्वविद्यालय में बीएससी नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्स शुरू करने पर भी सहमति बन गई है। दरअसल, शासन की ओर से इस संबंध में विश्वविद्यालय को नर्सिंग कोर्स के संबंध में प्रस्ताव भी मांगा गया है। इस बैठक में तय किया गया कि यह कोर्स मेडिकल कालेज के अधीन ही चलाया जाएगा और अलग से किसी इकाई को नहीं बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय में अगले सत्र में 40 सीटों पर बीबीए कोर्स भी शुरू करने को लेकर विद्या परिषद की बैठक में सहमति बन गई। इसके अलावा कई डिप्लोमा कोर्स विश्वविद्यालय और कालेजों की परिनियमावली में शामिल किए जाएंगे।
बीएससी माइक्रो बायोलाजी कोर्स होगा शुरू
बीएससी में माइक्रोबायोलाजी कोर्स को शुरू करने को लेकर भी बैठक में सहमति बनी है। इसके अलावा एमएससी माइक्रो बायोलाजी के सिलेबस को भी संशोधित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। एमएससी बायोटेक का नया पाठ्यक्रम भी बैठक में विचार किया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बीएड-एमएड में वायवा केवल बीएड प्रथम वर्ष में करने व बीएड द्वितीय वर्ष के प्रायोगिक व मौखिक परीक्षा के लिए तीन परीक्षकों की नियुक्ति करने पर विचार किया गया।
गणित में वायवा का अंक निर्धारण
गणित विषय में एमएससी उत्तरार्ध में मौखिक परीक्षा सौ अंकों की व बीएससी तृतीय वर्ष में 75 अंकों की करने पर भी विचार किया गया।
वाणिज्य विषय में किसी भी स्ट्रीम से प्रवेश नहीं
वाणिज्य विषय (बी.काम) में किसी भी स्ट्रीम के छात्र के प्रवेश संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। कहा गया कि यदि प्रवेश परीक्षा आयोजित हो रही हो तो यह हो सकता है। पर सीधे एडमीशन में इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जा सकता। एमए राजनीति शास्त्र के फाइनल इयर में रिसर्च मेथेडोलाजी का एक पेपर जोड़ने पर भी सहमति बनी है।
एमएससी एग्री में नया कोर्स अभी नहीं
एमएससी पशुपालन एवं दुग्ध उद्योग विषय में नया पाठ्यक्रम लागू करने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इस संबंध में विश्वविद्यालय की छह फैकल्टी में से केवल तीन फैकल्टी ही काम कर पाई है। ऐसे मेें इस पर निर्णय शेष तीन फैकल्टी के पाठ्यक्रम तैयार करने तक स्थगित कर दिया गया। बीए आनर्स में संस्कृत को शामिल करने के लिए विश्वविद्यालय और कालेजों की परि नियमावली में इसे शामिल करने पर सहमति बनी। बीटेक, इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रानिक्स में पाठयक्रम का बदलाव 2001 से लागू माना जाएगा।
विधि विषयों में संशोधन
बैठक में एलएलबी द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम मे जरूरी संशोधन पर भी सहमति बन गई। विधि संकाय में चार डिप्लोमा कार्यक्रमों को परि नियमावली में शामिल करने पर सहमति बनी। तीन वर्षीय, पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में संशोधन पर भी सहमति बनी। कुलपति की अध्यक्षता वाली इस बैठक में बीएड और एमएड विभाग का नाम बदलकर शिक्षा संकाय रखे जाने पर सहमति बनी। इसके अलावा एमएड के पाठ्यक्रम में संशोधन को लेकर भी सहमति बन गई।
लॉ के ये नए डिप्लोमा कोर्स होंगे शुरू
विद्या परिषद की बैठक में चार नए पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों को स्वीकृति दी गई। इनमें पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन लीगल एंड पैरालीगल एडवोकेसी, पीजी डिप्लोमा इन ह्यूमन राइट ड्यूटी, पीजी डिप्लोमा इन साइबर लॉ साइबर फारेंसिक, पीजी डिप्लोमा इन मीडिया लॉ।
रिसर्च स्कालर्स को होगा लाभ
शोध अध्यादेश 2013 के अंतर्गत ऐसे पंजीकृत छात्र जो वर्ष 2016 में पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा में सम्मिलित हुए और अनुत्तीर्ण हो गए, ऐसे छात्र आगामी कोर्स वर्क की परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे। वहीं आरडीसी के मामले में भी पुराने छात्रों को लाभ देने की बात की गई।