बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध डमी शिक्षकों वाले एक लॉ कॉलेज के प्राचार्य लखनऊ विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में शिक्षक में हैं। कॉलेज के प्राचार्य के नाम से ही इस मामले को लेकर रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शिकायत की गई है, लेकिन सेटिंग के चलते इस खेल से विश्वविद्यालय प्रशासन अनजान बना हुआ है।
हाल ही में रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने सभी महाविद्यालयों से मौखिक परीक्षा में आंतरिक परीक्षक बनाने के लिए कॉलेज में तीन वर्ष अनुभव वाले शिक्षकों की सूची मांगी गई थी। जब यह सूची विश्वविद्यालय में पहुंची तो सामने आया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 33 निजी लॉ कॉलेजों में से 15 ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक कागजों पर तैनात हैं। यानी कि यहां न तो पढ़ाई होती है और न ही शिक्षक तैनात हैं। बस विश्वविद्यालय में सेटिंग से पूरा खेल चल रहा है। इसी बीच पड़ोसी कस्बे के लॉ कॉलेज को लेकर विश्वविद्यालय में शिकायत की गई है कि वहां तैनात बताए जा रहे प्राचार्य समेत सात शिक्षक अन्य कॉलेजों में कार्यरत हैं। प्राचार्य लखनऊ में और अन्य शिक्षक प्रयागराज, रामपुर, उझानी एवं मिलक में कार्यरत हैं। यह शिकायत भी कॉलेज के प्राचार्य के नाम से ही की गई है।
भवन भी मानकों के अनुरूप नहीं
शिकायत में कहा गया है कि इस कॉलेज छात्र एवं छात्राओं के लिए निर्धारित कॉमन रूम, लाइब्रेरी और फायर सेफ्टी के इंतजाम तक नहीं हैं। छात्र-छात्राओं की जरूरत के मुताबिक कक्षाओं के लिए पर्याप्त कमरे भी नहीं हैं, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर मान्यता दे दी गई है।
विश्वविद्यालय नियमानुसार शिक्षकों का चयन करता है। अगर कोई शिक्षक दो कॉलेज से जुड़ा हुआ है तो यह गैर कानूनी है। विश्वविद्यालय में शिकायत हुई है तो कुलपति इसकी जांच कराएंगे।
- डॉ. नसीम अख्तर, डीन, विधि विभाग, रुहेलखंड विश्वविद्यालय