बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में डिग्री कॉलेजों को घूस लेकर मान्यता देने के मामली में राज्यपाल के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। रविवार को रिटायर्ड जज के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने इस मामले में आरोपी दोनों बाबुओं से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक बाबुओं ने टीम को बताया कि शिकायतकर्ता उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है और वे उसके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा चुके हैं। वहीं, वीडियो बनाने वाले ने भी अपना पक्ष रखा।
विश्वविद्यालय के बाबू जनार्दन राव और अनिल सिंह पर राजभवन में की गई एक शिकायत में मान्यता दिलाने की एवज में एक कॉलेज प्रबंधक से रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के साथ एक वीडियो भी भेजा गया था जिसमें आरोपी बाबू रुपये गिनते हुए नजर आ रहे हैं। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर रिटायर्ड जज एवं एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर खेमकरन, एग्जीक्यूटिव काउंसिल के ही दूसरे मेंबर बिंद्रा प्रसाद और एडिशनल एडवोकेट जनरल कुलदीपपति त्रिपाठी जांच के लिए शनिवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंचे।
जांच कमेटी ने कुलसचिव सुनीता पांडेय के साथ शनिवार को आरोपियों का वीडियो देखा। इसके बाद रविवार को आरोपी बाबू जर्नादन राव और अनिल सिंह से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक अपने बयान में आरोपी बाबुओं ने कहा है कि शिकायत करने वाला कॉलेज संचालक नहीं है। किसी ने रुपये गिनते हुए उनका वीडियो बना लिया और उन्हें ब्लैकमेल करने लगा। उन्होंने डीएम से शिकायत कर उसके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। एक आरोपी जेल भेजा गया। करीब तीन साल पहले इन्हीं लोगों के खिलाफ एक डॉक्टर ने भी ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने जांच टीम को रिपोर्ट की कॉपी भी सौंपी हैं। इससे पूर्व वीडियो बनाने वाले ने भी जांच कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा।
वीडियो में बोले- भाई हम क्या करें, रजिस्ट्रार भी लेते हैं पैसे
शिकायत के साथ जो वीडियो राजभवन भेजा गया है, उसमें आरोपी बाबू यह कहते हुए दिख रहे हैं कि पैसा तो रजिस्ट्रार और दूसरे कई उच्चाधिकारियों तक भी जाता है। शिकायतकर्ता पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा रहे बाबुओं को यह साबित करना मुश्किल पड़ेगा कि रुपये गिनते हुए उन्होंने रजिस्ट्रार और दूसरे अफसरों का जिक्र क्यों किया था।