किसी छात्र ने डिप्रेशन तो किसी ने टशन
दिखाना बताया हुक्का पीने का कारण..
- युवाओं में बढ़ते हुक्के के चलन को लेकर हार्टमन कॉलेज में हुआ संवाद कार्यक्रम
- एसएसपी बोले- अगर डिप्रेशन में हैं तो नशा नहीं, खेलकूद पर ध्यान दें
- सिटी मजिस्ट्रेट ने स्कूलों में ड्रग्स के धंधे को अब आम बताया
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। युवा पीढ़ी की नसों में जहर घोल रहे हुक्कों को लेकर अब तक सार्वजनिक तौर पर चर्चा से लोग बचते थे। अब इस लत से निपटने को लेकर लोग संजीदा हुए हैं। शैक्षिक संस्थाओं में इस पर खुली बहस होनी शुरू हुई है। शुक्रवार को हार्टमन कॉलेज में हुक्के की लत को लेकर नवीं से बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के बीच संवाद हुआ। कार्यक्रम में एसएसपी शैलेश पांडेय और सिटी मजिस्ट्रेट मदन मोहन भी पहुंचे। अभिभावक संघ ने नशे पर बनी एक वीडियो दिखाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।
मुख्य वक्ता अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने स्टाइल फैक्टर पर बात करते हुए संवाद की शुरुआत की। कुछ बच्चों ने नशे का कारण टेंशन, डिप्रेशन और अकेलापन बताया तो वहीं कुछ ने हुक्के को ग्रुप में बैठकर सिर्फ टशन दिखाने का जरिया बताया। कुछ बच्चों ने मजाकिया ढंग में गम भुलाने की बात भी कही।
एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने पुलिस की हुक्काबारों पर कार्रवाई की जानकारी देते हुए छात्रों से नशे पर बात की। कहा- यदि टेंशन, डिप्रेशन या किसी अन्य कारण से नशा करते हैं तो उससे दूर होने के लिए खेलकूद और अन्य कामों पर ध्यान दीजिए। साथ ही उन्होंने छात्रों को हुक्के या किसी भी नशे का सेवन करते पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि स्कूलों में ड्रग्स का धंधा अब आम हो चला है। हमारे समय में कभी ऐसा नहीं होता था। अगर हालात यही रहे तो युवा सेहत के साथ मानसिक संतुलन भी खो बैठेंगे। ऐसे में वह अपना जीवन खुद ही बर्बाद कर लेंगे। हार्टमन के फादर पीटर विजय मिंज ने बताया कि उनके स्कूल से इस मुहिम की शुरुआत हुई है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में संवाद के जरिए जागरूकता फैलाना था।