चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) चलाने को लेकर रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों ने जमकर रुचि ली है। पहले चरण में ही विश्वविद्यालय से एनओसी के लिए 250 से अधिक कॉलेजों ने आवेदन किया है।
सोमवार को इन कॉलेजों को एनओसी दी जाएगी। इसके बाद मान्यता संबंधी प्रक्रिया एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फोटो टीचर एजुकेशन) से पूरी होगी।
इंटर के बाद शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए लंबे समय से चर्चा चल रही थी। पिछले दिनों संसद से इसका प्रस्ताव पास होने के बाद एनसीटीई ने उत्तर प्रदेश में चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) चलाने को मंजूरी दे दी।
इसके बाद यह कोर्स संचालित करने के लिए प्रस्ताव को रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में रखा गया और वहां से भी मंजूरी मिल गई। कार्य परिषद की मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय ने अपने कार्यक्षेत्र बरेली और मुरादाबाद मंडल में यह पाठ्यक्रम संचालित करने के इच्छुक महाविद्यालयों से 26 जुलाई तक आवेदन मांगे थे।
इस दौरान विश्वविद्यालय को 250 से अधिक आवेदन मिले हैं। सोमवार 29 जुलाई को इन कॉलेजों को विश्वविद्यालय से एनओसी मिल जाएगी। इसके बाद एनसीटीई की टीम कॉलेजों में निरीक्षण कर मान्यता की प्रक्रिया पूरी करेगी।
हर कॉलेज को मिलेंगी कम से कम 50 सीटें
सूत्रों का कहना है कि मान्यता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आईटीईपी कोर्स संचालित करने के लिए हर कॉलेज को कम से कम 50 सीटें आवंटित होंगी। इस तरह रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिक्षेत्र में सवा लाख से ज्यादा सीटें बढ़ जाएंगी।
एक साल का बचेगा समय
इस समय शिक्षक बनने के लिए स्नातक के बाद डीएलएड और बीएड जैसे कोर्स संचालित हैं। इनके जरिये शिक्षक बनने के लिए स्नातक के लिए तीन वर्ष और दो वर्ष में बीएड या बीएलएड करने में शिक्षक बनने के लिए पांच सात लगते थे। आईटीईपी अभ्यर्थियों को इंटर के बाद ही शिक्षक बनने का मौका देगा। यह कोर्स चार साल का होने से एक साल का समय बचेगा।
चार वर्षीय शिक्षक पाठ्यक्रम के लिए 250 से ज्यादा कॉलेजों ने आवेदन किया है। विश्वविद्यालय से एनओसी मिलने के बाद एनसीटीई से इन्हें मान्यता मिलेगी।
- प्रो. बीआर कुकरेती, विभागाध्यक्ष बीएड विभाग, रुहेलखंड विश्वविद्यालय