बरेली। बरेली कॉलेज में शिक्षकों की वरिष्ठता में घोटाला सामने आया है। तैयार की गई सूची में वरिष्ठों को निचले पायदान पर फेंक दिया गया और जूनियर शिक्षकों को विभाग सौंप दिए गए। एक एसोसिएट प्रोफेसर ने मामला अदालत में पहुंचाया तो हाईकोर्ट ने वरिष्ठता सूची लागू करने के आदेश दिए। लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट का आदेश भी दरकिनार कर दिया।
पिछले दिनों रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बरेली और मुरादाबाद मंडल के कॉलेजों से शिक्षकों की वरिष्ठता सूची उपलब्ध कराने के साथ ही इसे लागू करने के निर्देश दिए थे। मगर बरेली कॉलेज में यह मामला भी राजनीति का शिकार हो गया। यहां मिलीभगत करके शिक्षकों की वरिष्ठता में भी घोटाला कर दिया गया। वरिष्ठ शिक्षकों को जूनियर बना दिया गया है और जूनियर विभागाध्यक्ष बने बैठे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. टीएस चौहान ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से शिकायत की। जब कोई असर नहीं हुआ तो वह मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गए। हाईकोर्ट ने वरिष्ठता सूची को लागू करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन इसे लागू नहीं कर रहा।
साल भर में ही बदल गई वरिष्ठता सूची
बरेली कॉलेज में जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में तैयार की गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा अंतर है। जुलाई 2017 की सूची में जो शिक्षक ऊपरी पायदान पर हैं, वे जुलाई 2018 की सूची में नीचे खिसक गए हैं। ऐसे में जब जुलाई 2018 की वरिष्ठता सूची लागू की जाएगी तो कुछ विभागाध्यक्षों को हटना पड़ेगा।
पूर्व प्राचार्य के इशारे पर ऐसे हुई गड़बड़ी
कॉलेज के कुछ शिक्षकों का कहना है कि यह सारी गड़बड़ी एक पूर्व प्राचार्य ने की। सेटिंग करके चहेतों को वरिष्ठ बनाने के लिए उन्होंने रिकॉर्ड में हेराफेरी करके उसमें बदलाव कर दिया। बताया जाता है कि उस दौरान कुछ शिक्षकों की संविदा पर काम शुरू करने की तिथि को ही उनके स्थायी होने की तिथि में बदलाव करके यह खेल किया।
‘विश्वविद्यालय से निर्धारित प्रारूप पर कॉलेज के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची मांगी गई है। हाईकोर्ट से वरिष्ठता सूची लागू करने के निर्देश मिले हैं। इसको लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। एक-दो दिन में सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।’
- डॉ. अजय कुमार शर्मा, प्राचार्य, बरेली कॉलेज
‘कॉलेज में चार-पांच तथाकथित शिक्षकों ने वरिष्ठता सूची को निजी संपत्ति समझ लिया है। पुरानी सूची में तमाम गड़बड़ियां भी हैं। नई सूची लागू कराने के लिए मैंने विश्वविद्यालय और हाईकोर्ट में मामले को पहुंचाया है।’
- डॉ. टीएस चौहान, एसोसिएट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज