बरेली। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को एक बार फिर महादानियों की जरूरत है। कई ब्लड ग्रुप का रक्त खत्म होने से संबंधित ग्रुप के मरीजों की जान सांसत में हैं। जरूरत पड़ने पर स्वैच्छिक रक्तदाता पहुंचकर मरीजों की जान बचा रहे हैं।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. अरुण सचान के मुताबिक एबी पॉजिटिव और बी निगेटिव ग्रुप का रक्त खत्म हो गया है। इन ग्रुप के रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीज की जान बचाना कठिन है। ऐसी दशा में स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले समूहों को कॉल करके बुलाया जा रहा है।
बताया कि पिछले दो माह में गिन चुने लोग ही रक्तदान करने पहुंचे। अब पॉजिटिव और निगेटिव दोनों ग्रुप में सिर्फ 21 यूनिट ही रक्त शेष है। इसमें ए पॉजिटिव के पांच, बी के सात, ओ के छह, एबी के शून्य और निगेटिव में ए ग्रुप का एक, बी का शून्य, ओ का एक, एबी ब्लड ग्रुप का सिर्फ एक यूूनिट ही खून बचा है। रक्तदान शिविर आयोजित कराने का पत्र मिला है, पर उसके आयोजन में अभी देर है। उन्होंने शहरवासियों से रक्तदान की अपील की है।
विशेष परिस्थितियों में बगैर
डोनर मुहैया कराते हैं रक्त
जनसंपर्क अधिकारी मनोज ने बताया कि जिला अस्पताल में दुर्घटना के कई केस आते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जिनके परिजन साथ नहीं होते। लिहाजा, उन्हें ब्लड बैंक से बिना एक्सचेंज के ही खून दिया जाता है। परिजन साथ हैं तो उनसे एक यूनिट ब्लड डोनेट कराया जाता है। बताया कि एक यूनिट ब्लड से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है, क्योंकि उसके चार हिस्से करने पर प्लाज्मा के साथ रेड और व्हाइट ब्लड सेल्स भी अलग हो जाती हैं।हर बार रहते हैं तैयार
शुक्रवार को इकबाल सिंह बाले के पास रक्त यूनिट कम होने पर इंचार्ज ने कॉल कर सूचना दी। वह दो महादानी मनोज अरोरा (राजू), राजेश छाबड़ा को साथ लेकर पहुंचे और रक्तदान कराया। रविवार को फिर सूचना मिलने पर विशाल मेहरोत्रा, धर्मेश कौशल, मोनू शर्मा ने महादान किया।