बरेली। नगर निगम की ओर से नालों की सफाई के लिए लाखों रुपये के ठेके दिए जाने के बावजूद शहर के प्रमुख नाले गाद, प्लास्टिक और कचरे से पटे पड़े हैं। हैरत की बात है कि दावों में ठेकेदारों ने इन नालों को साफ भी कर दिया है। मानसून से ऐन पहले सामने आई इस बदहाली ने बारिश के दौरान शहर में जलभराव की आशंका को बढ़ा दिया है।
नगर निगम प्रशासन ने शहर के नालों की सफाई का जिम्मा पांच अलग-अलग एजेंसियों को सौंपा है। पटेल चौक से चौपुला चौराहे तक और रघुवंशी कॉम्प्लेक्स से चौपुला चौराहे तक कुल 1840 मीटर लंबे दो प्रमुख नालों की सफाई का ठेका 3.76 लाख रुपये में मैसर्स जय महाकाल को दिया गया था। ठेकेदार का दावा है कि इन नालों को दो से चार बार साफ किया जा चुका है।
जब टीम ने मौके पर जाकर देखा तो स्थिति इसके बिल्कुल उलट मिली। नाले पूरी तरह चोक नजर आए। इनमें भारी मात्रा में सिल्ट (गाद) जमा मिली। मैसर्स इम्तियाज, मैसर्स आरके कांट्रेक्टर, मैसर्स सांई कांट्रैक्टर, मैसर्स बाबू अली और मैसर्स यस ट्रेडर्स को आवंटित किए गए नालों की स्थिति भी खराब मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 28 अप्रैल को नाला सफाई का अनुबंध होने के बाद से अब तक पर्याप्त समय था, लेकिन अधिकारियों की ढिलाई के कारण ठेकेदारों ने केवल औपचारिकता पूरी की। वहीं, एक्सईएन राजीव राठी ने बताया कि लगातार नाला सफाई की निगरानी जा रही है। जो ठेकेदार काम नहीं कर रहे है उनके विरुद्ध कार्रवाई जारी है।