खानकाह तहसीनिया की ओर से की गई मांग, कहा- बाजार खुले तो खतरे के बावजूद बेतहाशा भीड़ उमड़ना तय
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अभी सोच लें, अगर कोरोना के केस बढ़े तो कौन लेगा जिम्मेदारी
बरेली। कोरोना संकट के गंभीर दौर में खानकाह-ए-रजविया नूरिया तहसीनिया की ओर से समाज के प्रति जिम्मेदारी भरा रुख दिखाते हुए जिला प्रशासन से मांग की गई है कि ईद से पहले बाजार खुलने की अनुमति किसी भी हालत में न दी जाए। खानकाह की ओर से कहा गया है कि यह साफ है कि बाजार खुलते ही बेतहाशा भीड़ बढ़ेगी। लिहाजा अनुमति देने से पहले यह सोच लिया जाए कि अगर बाजार खुलने से कोरोना के केस बढ़े तो इसकी जिम्मेदारी कौन अपने सिर लेगा।
खानकाह के प्रबंधक और इत्तेहाद ए अहले सुन्नत मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोहैब रजा खान ने शहर के बाजार खोलने के बारे में खानकाह का रुख साफ करते हुए कहा कि जिले में लगातार कोरोना के केस मिल रहे हैं और शहर से लेकर देहात तक कई इलाके हॉटस्पॉट बने हुए हैं। हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि खतरा बढ़ता जा रहा है। लिहाजा कोई गारंटी नहीं कर सकता कि संकट का यह दौर कब तक खत्म होगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में अगर बाजार खोलने की इजाजत दी जाती है तो यह लाजमी है कि पूरे जिले के बाजारों में बेतहाशा भीड़ उमड़ेगी और फिर कोई यह जमानत लेने की हालत में नहीं होगा कि कोरोना केस बढ़ने पर ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि खानखाह ए रजविया नूरिया तहसीनिया की ओर से एक शिष्टमंडल जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर भी ईद से पहले बाजार न खोलने की दरखास्त करेगा।
वतन की हालत देखें मुसलमान खरीदारी को बाजारों में न जाएं
सोहैब रजा खान ने बताया कि खानकाह की ओर से वह पहले ही मुसलमानों से इस बार ईद सादगी के साथ मनाने की अपील कर चुके हैं। अब फिर कहना चाहते हैं कि मुसलमान वतन ए अजीज के हालात देखते हुए अगर नए कपड़े न भी बनाएं तो शरीयत में इसकी कोई पाबंदी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि जो लोग साहिबे हैसियत के हैं, वे ईद के पैसे से मुसाफिरों और कामगारों के खाने का इंतजाम करें। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि ईद पर वे किसी हालत में खरीदारी के लिए बाजारों में न जाएं।