आर्य समाज अनाथालय में 14 साल से रह रही मुन्नी उर्फ डॉली के करोड़पति बनने की कहानी अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बदायूं की डीएम अनिता श्रीवास्तव ने जमीन पर उसे कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी है। डीएम ने एसडीएम दातागंज से मुन्नी उर्फ डॉली की संपत्ति का ब्यौरा मांगा है। हालांकि शैक्षिक अभिलेखों में मुन्नी उर्फ डॉली का नाम तपस्या होने से पेच फंस गया है।
बदायूं के थाना हजरतपुर के गांव कुडरा मजारा से तीन मार्च, 2000 को एसडीएम दातागंज के आदेश पर तीन साल की उम्र में मुन्नी को अनाथालय में दाखिल किया गया था। अनाथालय में उसे डॉली नाम मिला लेकिन छह साल की उम्र होने पर जब उसे उसे गुरुकुल विद्यालय, नजीबाबाद (बिजनौर) में दाखिले के लिए भेजा गया तो वहां तपस्या नाम से प्रवेश दिला दिया गया, जबकि अनाथालय से उसके कागज मुन्नी उर्फ डॉली के नाम से ही भेजे गए थे। तपस्या नाम से ही मुन्नी उर्फ डॉली ने हाईस्कूल की परीक्षा पास की, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि कानूनी तौर पर यह गलत है। नाम बदलने के लिए तो बाकायदा कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, लेकिन मुन्नी उर्फ डॉली का नाम बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए कैसे बदल गया? अनाथ बच्ची का नाम भूलवश बदला या किसी सोची समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया, यह जांच का विषय है। मुन्नी उर्फ डॉली ने आधार कार्ड भी तपस्या के नाम से ही बनवा रखा है। जबकि गांव में उसकी संपत्ति मुन्नी उर्फ डॉली के नाम से ही दर्ज है।
नाम में परिवर्तन से उसे संपत्ति मिलने में पेच फंस गया है। अनाथालय के प्रधान अमृतलाल नागर का कहना है कि उन्होंने डीएम बदायूं को अनाथ लड़की की संपत्ति को लेकर पत्र लिखा है। वहां से जवाब आया है कि पत्राचार मुन्नी उर्फ डॉली के नाम से ही किया जाए। बाद में बदले गए नाम की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। लिहाजा संपत्ति के लिए कागजी कार्रवाई मुन्नी उर्फ डॉली के नाम से ही पूरी की जाएगी।
मुन्नी उर्फ डॉली के बारे में अमर उजाला से ही जानकारी मिली है। इस संबंध में एसडीएम दातागंज से रिपोर्ट मांगी गई है। अनाथालय की तरफ से कोई शिकायत आती है तो उसकी जमीन को अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराया जाएगा। ताकि अब बालिग होने पर मुन्नी उर्फ डॉली को उसकी संपत्ति मिल सके और वह अपना जीवन खुशहाली के साथ बिता सके।
- अनिता श्रीवास्तव, डीएम बदायूं