डीएम से पहले पहुंच गई छापे की सूचना
डीएम के आरटीओ ऑफिस पहुंचने से पहले ही छापे की सूचना वहां पहुंच गई। इसके बाद तमाम दलाल अपना सामान समेटकर चले गए। डीएम जब आरटीओ ऑफिस पहुंचे तो उनको गिने-चुने लोग ही मिले। दो दिन पहले भी आरटीओ ऑफिस पर औचक छापे की तैयारी थी। उस दौरान भी छापे की सूचना पहले ही पहुंच गई थी। बाद में छापे की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया था।
पड़ोस की दुकान में मिले वाहनों के कागजात
आरटीओ ऑफिस के पास ही स्थित बालजी सेल्स नाम की दुकान पर डीएम के साथ पहुंची टीम ने जांच की तो वहां कई दोपहिया और चार पहिया वाहनों के कागजात मिले। इन वाहन स्वामियों के बारे में पता किया तो कोई नहीं मिला। यहां सुनील शर्मा नाम के व्यक्ति से पूछताछ की गई तो वह भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जिन वाहनों के कागजात मिले हैं, उनमें कुछ का ट्रांसफर होना है और कुछ वाहनों की फिटनेस बननी है। मौके से कुछ ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी कागजात मिलने के बाद सुनील शर्मा को हिरासत में ले लिया गया।
जांच हुई तो खुलेगा फर्जी शपथपत्र बनाने का रैकेट
परिवहन विभाग में कई कार्यों के लिए शपथपत्र की जरूरत होती है। कलक्ट्रेट और तहसील परिसर आरटीओ ऑफिस से काफी दूर है। ऐसे में कुछ लोग आरअीओ कार्यालय के आसपास ही फर्जी शपथपत्र बनाने का धंधा करते हैं। आरटीओ कार्यालय में घूमते मिले अलखनाथ मंदिर छीपी टोला निवासी अफजाल हैदर के पास से आरटीओ के नाम खरीदे गए 10-10 रुपये के 78 ई-स्टांप मिले हैं।
इन स्टांप पर शपथपत्र का प्रारूप तो दर्ज था, लेकिन शपथकर्ता का नाम, पता आदि रिक्त था। उसके पास कुछ मुहरें भी मिली हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि यहां फर्जी शपथपत्र बनाने का धंधा भी चल रहा था। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अफजाल किस नोटरी वकील के नाम से शपथपत्र बनाने का काम करता था। इसकी बारीकी से जांच में फर्जी शपथपत्र बनाने के धंधे का भी खुलासा हो सकता है।