बरेली। आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण के मामले में मार्च में जिले की रैंकिंग 10वीं थी। अप्रैल में यह पांचवें नंबर पर आ गई। इसको लेकर अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। शिकायतों को ऑनलाइन निस्तारित कर दिया गया, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हुआ। न्याय पाने के लिए फरियादी बार-बार अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। अप्रैल में 4675 शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिए गए तो 757 फरियादियों निस्तारण से असंतुष्टि जाहिर की।
केस एक
भोजीपुरा ब्लॉक के घघोरा पिपरिया निवासी भागीरथ ने सितंबर में सदर तहसील में खतौनी संशोधन के संबंध में शिकायत की थी। ऑनलाइन शिकायत को निस्तारण दिखा दिया गया, लेकिन खतौनी पर अब तक उनका नाम संशोधित नहीं हो पाया।
केस दो
सदर तहसील के गिरधारीपुर निवासी बृजेश कुमार ने पक्की पैमाइश के लिए आवेदन किया है। वर्ष 2022 में कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक सुनवाई नहीं हो सकी। इसमें लेखपाल की तरफ से दूसरी रिपोर्ट लगा दी गई है। अब तक वह 25 बार तहसील का चक्कर काट चुके हैं।
केस तीन
मीरगंज तहसील के चंदपुर जोगियान निवासी चांद बाबू ने वर्ष 2024 में उनकी जमीन पर कूड़ादान बनाने की शिकायत की थी। लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर बगैर उनकी सहमति से रिपोर्ट लगा दी। उनका हस्ताक्षर भी नहीं कराया। वह दो साल से विभाग का चक्कर काट रहे हैं।
केस चार
शहर के रामपुर गार्डन में अनुरोध अग्रवाल हाउस टैक्स के गलत बिल को लेकर आठ साल से निगम का चक्कर काट रहे हैं। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने इसमें से कुछ धनराशि जमा भी कर दी।