बरेली। नगर निगम के कर्मियों ने बृहस्पतिवार को निगम दफ्तर के मुख्य गेट पर ताला लगाकर धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। अस्पताल से जुड़े लोगों पर दो सौ करोड़ की संपत्ति कब्जाने का आरोप लगाते हुए डीएम से अस्पताल निदेशक को भूमाफिया घोषित करने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद कमिश्नर, डीएम और नगर आयुक्त को ज्ञापन की एक-एक प्रति नगर निगम कर्मियों ने भेजी। यूनियन नेता जयपाल सिंह पटेल की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है सील तोड़ने की सूचना मिलने पर वह दो कर्मचारियों के साथ अस्पताल गए तो वहां नगर निगम की ओर से लगाई गईं सील गायब थीं। अस्पताल प्रबंधन और उनके स्टाफ ने उन्हें दोनों कर्मचारियों के साथ कैद कर लिया और मारपीट की। इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि इसके बाद जब नगर निगम की टीम प्रशासन और फोर्स के साथ में अस्पताल पर फिर से कब्जा लेने गई तो अस्पताल प्रबंधक ने अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर विरोध किया और गेट नहीं खोला। टीम वापस लौट आई तो प्रबंधक ने नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट दर्ज करा दी। अस्पताल प्रबंधन नगर निगम की दो सौ करोड़ से अधिक संपत्ति पर कब्जा जमाए है। निगम कर्मचारियों ने डीएम से मांग की है कि अवैध कब्जा करने वाले अस्पताल प्रबंधन का नाम भूमाफिया की सूची में डालकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आगे भी प्रदर्शन किया जाएगा।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा-कोर्ट में लंबित है मामला
धर्मदत्त सिटी हॉस्पीटल के निदेशक डॉ. अनुपम शर्मा ने कहा कि विवाद के निस्तारण के लिए ही मुकदमा कोर्ट में लंबित है। हम विधिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। हम अपना पक्ष कोर्ट में रख रहे हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन अनावश्यक रूप से दबाव बना रहा है और परेशान कर रहा है।
नगर निगम ने मुकदमा ट्रांसफर करने की दी अर्जी
बरेली। अस्पताल संचालक डॉ. अनुपम शर्मा की ओर से सिविल कोर्ट में वाद दायर किया गया है। इसमें बृहस्पतिवार को तीसरे दिन भी सुनवाई हुई। इस बीच नगर निगम की ओर से मुकदमे को सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट से हटाने के लिए जिला जज की अदालत में अर्जी दी। ट्रांसफ र एप्लीकेशन को पंजीकृत कर कोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 अप्रैल को तारीख नियत की है।
सिटी अस्पताल मामले में बृहस्पतिवार को सिविल जज की अदालत में सुनवाई स्थगित कर दी गई। नगर निगम की ओर से अर्जी देकर कहा गया कि सिटी अस्पताल की ओर से आदेश हासिल करने के लिए जो अर्जी लगाई गई है, उसमें सभी पक्षकारों के नाम नहीं है, इसलिए अर्जी को ठीक कराया जाए और सभी पक्षकारों के नाम जुड़वाए जाएं, इस पर कोर्ट ने पांच अप्रैल की तारीख तय की है। इसी मामले में बृहस्पतिवार को नगर निगम की ओर से वकील नंदन सिंह ने जिला जज के यहां अर्जी लगा कर कहा कि सिटी धर्मदत्त अस्पताल मामले को किसी और अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाए। इस अर्जी पर सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
यह है पूरा मामला
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल नगर निगम की भूमि पर चल रहा है। वर्ष 2003 में नगर निगम बोर्ड इसकी लीज निरस्त कर चुका है, लेकिन फि र भी उसे खाली नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2018 में अस्पताल प्रबंधन ने बीडीए में भूमि को फ्र ी होल्ड कराने के लिए आवेदन किया था। तीस लाख रुपये जमा कराए गए थे। बीडीए ने आवेदन निरस्त कर रकम लौटा दी थी। अस्पताल प्रबंधन ने इसके बाद दोबारा रकम जमा कराने का प्रयास किया। इसका साक्ष्य कोर्ट के सामने प्रस्तुत कर दिया गया है। नगर निगम के मुताबिक, बरेली नगर पालिका ने 1910 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। 1945 में जमीन को 10 रुपये सालाना की दर पर धर्मदत्त चैरिटेबिल अस्पताल को 90 साल के पट्टे पर दिया गया। 2003 में पट्टे को निरस्त कर दिया गया। पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में नगर निगम ने यहां कुछ जमीन अपने कब्जे में ले ली। उस पर अब स्टोर और जोनल कार्यालय बना हुआ है।
बीडीए कर चुका है इनकार
धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन ने दावा किया है कि जमीन पर स्वामित्व की लड़ाई बरेली विकास प्राधिकरण से है, लेकिन इसे बीडीए खारिज कर चुका है। बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह का कहना है कि धर्मदत्त सिटी अस्पताल जिस जमीन पर बना है, वह बीडीए की नहीं है। इस जमीन के कोई दस्तावेज भी बीडीए के पास नहीं हैं, लिहाजा स्वामित्व का दावा करने का कोई आधार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते बीडीए का नाम इस प्रकरण में क्यों लिया जा रहा है। जमीन बीडीए की नहीं है।