बरेली। नगर निगम में हुई 14वें वित्त आयोग की बैठक में उपलब्ध धनराशि के सापेक्ष 40 करोड़ के प्रस्तावों को पारित किया गया। इनमें से 14.34 करोड़ रुपये से सड़कों और नाले-नालियों का निर्माण कराया जाना है। करीब 11 करोड़ से निर्माण कार्यों के ऐसे प्रस्ताव रद्द भी किए गए जिन्हें पहले ही दूसरे विभागों की ओर से करा दिया गया था फिर भी उन पर अलग प्रस्ताव बनाकर बैठक में पेश कर दिए गए थे।
मेयर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पारित हुए मुख्य प्रस्तावों में एक सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जरूरी सामान खरीदने और सीवरेज का था। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट के लिए नई एलईडी लाइटें खरीदकर सभी वार्डों मेें लगवाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। सड़कों और नाले-नाली के निर्माण के लिए 14.34 करोड़ का प्रस्ताव पास हुआ। विभिन्न कारणों से 1.08 करोड़ की लागत के पुराने 11 प्रस्तावों को निरस्त कर दिया गया। पुनरीक्षित कार्यों के लिए 2.03 करोड़, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दस करोड़, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के सामान की खरीद के लिए 2.4 करोड़, स्ट्रीट लाइट के लिए 3.67 करोड़ का प्रस्ताव पास किया गया। नेकपुर से चौपुला पुल के नीचे तक पूर्व मेयर सुभाष पटेल के आवास से पुलिया तक आरसीसी नाले के निर्माण को 26.50 लाख और मुंशीनगर से सौफुटा रोड तक नाले के निर्माण को सीएंडडीएस जल निगम से सर्वे कराकर धनराशि सीएनडीएस को ही हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी। इसके लिए 2.5 करोड़ का बजट तय किया गया।
बैठक का खास पहलू 10.85 करोड़ के 11 प्रस्तावों को निरस्त करने का रहा। इनमें अधिकतर प्रस्ताव ऐसे थे जिनपर पहले ही दूसरे विभाग निर्माण करा चुके थे। इन प्रस्तावों में तीन सड़कें ऐसी मिलीं जो पीडब्ल्यूडी की थीं। फिर भी इन्हें बनाने का प्रस्ताव शासन को प्रस्ताव भेजकर 112.20 लाख का बजट ले लिया गया था। इनमें वार्ड 54 भूड लल्ला मार्केट के पीछे हाटमिक्स सड़क के लिए करीब आठ लाख 88 हजार का प्रस्ताव बनाया गया था। वार्ड 65 स्वतंत्रता संग्राम कॉलोनी में सीसी टाइल्स सड़क और नाली के लिए 11 लाख 83 हजार का बजट लिया गया था। वार्ड 12 में सीसी टाइल्स और नाली के लिए आठ लाख 12 हजार का काम भी पहले ही हो चुका था। फिर भी इन प्रस्तावों पर शासन से पैसा लिया गया।
विवादित स्थल का भी प्रस्ताव बनाकर ले लिया बजट
पिछले साल निगम अधिकारियों ने वार्ड 17 में कुसुमनगर में तिवारी के मकान से सोनू के मकान तक सीसी टाइल्स और नाली निर्माण के लिए आठ लाख 38 हजार का प्रस्ताव तैयार कर बजट ले लिया। बाद में यह स्थल ही विवादित पाया गया। सकलैनी नगर में मुन्ने सलमानी मकान से शोएब खान से मुन्ने कबाड़ी मकान की ओर से आरसीसी नाला बनाने के लिए भी 49.52 लाख रुपये ले लिए गए। बाद में पाया गया कि नाले के अंतिम छोर पर निकासी ही नहीं है। इस जमीन पर जल निगम के सीटीपी लगाने को कार्रवाई भी करने की बात सामने आई। वार्ड 37 में नदौसी में सिटी फारेस्ट भूमि की फेंसिंग के के लिए 4.55 लाख का बजट ले लिया गया। इसे अनावश्यक ंमाना गया। संजयनगर में सक्सेना प्रापर्टी डीलर से देवलीला स्कूल होते हुए हरिओम के मकान तक नाली तथा सीसी सड़क निर्माण दूसरे विभागों ने करा दिए थे लिहाजा इसे भी निरस्त कर दिया गया।
तीन सड़कें बनाने को पीडल्ब्यूडी को देंगे 1.12 करोड़
तीन ऐसी सड़कों का प्रस्ताव भी रखा गया जो जो मूलरूप से पीडब्ल्यूडी की थीं। इनके निर्माण के लिए निगम ने 1.12 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजकर बजट प्राप्त कर लिया था। इनमें जौहरपुर रेलवे फाटक से मदरसे तक आरसीसी नाले के 26.30 लाख, दुर्गा मंदिर से अशोका लीलैंड शोरूम तक आरसीसी नाले को 33.9 लाख, मथुरापुर से में मदरसे से मथुरापुर मेन रोड तक नाले के लिए 52 लाख के प्रस्ताव पर शासन से बजट भी पास करा लिया गया। पूर्व नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन ने यह गड़बड़ी पकड़ ली। दरअसल इन कार्यों पर पहले से वन विभाग की रोक थी। ये रोड पीडब्ल्यूडी के होने के कारण 28 अगस्त 2019 को पॉल ने उसके अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर नाला बनवाने को कहा। डीएम के आदेश पर पीडल्यूडी ने भी इस कार्य के प्रस्ताव का व्यय अनुमान जांचा जो सही पाया गया। इसके बाद अब निगम इस मद का एक करोड़ 12 लाख रुपये पीडल्ब्यूडी को हस्तांतरित करेगा।