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सैन्य क्षेत्र के पास निर्माण के लिए एनओसी

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बिल्डर बेचैन.. एयरफोर्स स्टेशन के पास
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खरीदी करोड़ों की जमीनों का क्या होगा
सैन्य इलाकों के नजदीक निर्माण के लिए सेना की एनओसी अनिवार्य करने की प्रक्रिया की शुरू
2016 में जारी गाइड लाइन में नहीं था बरेली का नाम, इस बार असमंजस
वित्त मंत्री का लोकसभा में एलान- केंद्र सरकार सांसदों से भी लेगी राय
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सैन्य क्षेत्रों के आसपास किसी भी निर्माण के लिए सेना की एनओसी को अनिवार्य किए जाने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर एक बार फिर प्रक्रिया शुरू होने से बिल्डरों में बेचैनी का माहौल है। हालांकि तीन साल पहले इस संबंध में रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी गाइड लाइन में बरेली का नाम शामिल न होने से असमंजस की स्थिति भी है। बिल्डर यह जानने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि नई गाइड लाइन में बरेली के सैन्य प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाएगा या नहीं। बिल्डरों का यह भी कहना है कि अगर यह नियम बरेली में भी लागू हुआ तो उनका करोड़ों रुपये का निवेश खतरे में पड़ जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में जानकारी दी थी कि रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके आसपास किसी भी निजी निर्माण के लिए सेना की एनओसी जरूरी करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया शुरू की है। केंद्र सरकार के इस फैसले से सैन्य क्षेत्रों के आसपास जमीनें खरीदकर करोड़ों रुपये का निवेश कर चुके बरेली के तमाम बिल्डरों में इससे बेचैनी का माहौल है। उनकी निगाह केंद्र सरकार की नई गाइड लाइन के प्रावधान जानने पर टिकी हुई है।
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सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने देश भर के सभी सांसदों से इस संबंध में राय मांगी है। बरेली में भी यह गाइड लाइन लागू होगी या नहीं, इस पर असमंजस है क्योंकि 21 अक्तूबर 2016 को रक्षा मंत्रालय की ओर से जो गाइड लाइन हुई थी, उसमें सिर्फ लखनऊ, सीतापुर, मेरठ, बाराबंकी, फैजाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, कानपुर नगर, सहारनपुर, मथुरा, हापुड़, आगरा आदि जिलों के नाम थे। बरेली का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं था।
बिल्डरों का कहना है कि नई लिस्ट में बरेली का नाम शामिल किया जाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। कुछ हद तक यह सांसद की राय पर भी निर्भर करेगा। सूत्रों के मुताबिक 2016 में गाइड लाइन के संशोधित होने से पहले इस लिस्ट में बरेली का नाम शामिल था। ऐसे में 2016 की गाइड लाइन में बरेली का नाम न होने का मतलब है कि बरेली में सौ मीटर के दायरे के अंदर निर्माण के लिए एनओसी अनिवार्य किए जाने का पुराना नियम ही लागू रहेगा। इस संबंध में जानकारी के लिए सैन्य अफसरों को फोन किया गया लेकिन उनके नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हुई।
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वर्जन:
रक्षा मंत्रालय की ओर से 2016 में जारी गाइड लाइन में बरेली का नाम शामिल नहीं है। नए नियम क्या बनेंगे यह साफ नहीं है। सभी सांसदों से केंद्र सरकार ने इस संबंध में उनकी राय पूछी है। पुराने सर्कुलर में सौ मीटर के दायरे में निर्माण पर एनओसी की शर्त लागू थी लेकिन 2016 की गाइड लाइन से बरेली का नाम हटा दिया गया। - रमनदीप सिंह, संयुक्त सचिव क्रेडाई नेशनल
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