Despite the orders of the government, degree fairs were not held in colleges
बरेली। शासन के आदेश के बावजूद महाविद्यालयों में उपाधि मेलों का आयोजन नहीं किया गया। हाल ही में राजभवन से उपाधि मेलों के बारे में जानकारी मांगने पर अब अधिकारी शासनादेश की अनदेखी को बहानों से ढकने की कोशिश कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण को भी मेलों का आयोजन न करने का कारण बताया जा रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों से उपाधियों के वितरण का रिकॉर्ड भी मांगा है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पहले शासन ने आठ से दस जनवरी के बीच महाविद्यालयों में उपाधि मेले का आयोजन करने का निर्देश जारी किया था। मेलों में कितनी उपाधियां वितरित की गईं, इसका रिकॉर्ड भी दीक्षांत समारोह की शुरुआत से पहले सुबह 11 बजे तक उपलब्ध कराने को कहा गया था मगर किसी भी कॉलेज ने उपाधि मेले के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। कोरोना संक्रमण की वजह से आननफानन वर्चुअल दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ लिहाजा उपाधि मेले का जिक्र तक नहीं हुआ।
हाल ही में राजभवन से उपाधि मेलों के बारे में रिपोर्ट मांगी गई तो अधिकारी सकते में आ गए। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी महाविद्यालयों को पत्र भेजकर उपाधि मेलों के आयोजन और उपाधि वितरण का रिकॉर्ड मांगा है। बरेली कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन के मुताबिक कोरोना संक्रमण के बीच ऑफलाइन मेले का आयोजन करना संभव नहीं था। फिर भी अवकाश के बावजूद कार्यालय का उपाधि वितरण काउंटर खुला था। जो विद्यार्थी कॉलेज आ रहे हैं, उन्हें उपाधि वितरित की जा रही है।
तीन लाख से ज्यादा उपाधि होनी थीं वितरित : विश्वविद्यालय के मुताबिक बरेली, मुरादाबाद मंडल के नौ जिलों के संबद्ध 563 महाविद्यालयों में उपाधि वितरण के लिए मेलों का आयोजन किया जाना था। 507 स्ववित्त पोषित और 56 राजकीय और वित्त पोषित महाविद्यालयों में तीन लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को उपाधियों का वितरण किया जाना था। दीक्षांत समारोह के साथ विश्वविद्यालय परिसर में भी चार हजार उपाधियों का वितरण होना था। इसमें से 27 सौ उपाधि ही बंटीं हैं। महाविद्यालयों में कितनी उपाधि अब तक बंटी इसका रिकॉर्ड अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगा है ताकि उसे राजभवन भेजा जा सके।