सर्वेक्षण से यह पता लगेगा
- किस चौराहे पर कितना है ट्रैफिक, कितना और बढ़ने के आसार।
- आवागमन के दौरान कहां-कहां हादसे का है खतरा, कैसे खत्म हो।
- सुरक्षित यातायात के प्रबंधन के लिए क्या काम कराना जरूरी।
- चौराहों की भौगोलिक परिस्थिति का आकलन रिकार्ड में लाया जाएगा।
इन चौराहों पर ट्रैफिक की गणना के साथ सर्वेक्षण होगा
सेटेलाइट, श्यामगंज, डेलापीर, बीसलपुर चौराहा, चौपुला, ईंट पंजाया, चौकी चौराहा, बरेली कॉलेज, मिनी बाईपास, नॉवेल्टी चौराहा।
महापौर उमेश गौतम ने कहा कि विकास को रफ्तार देने की वजह से बरेली में आवागमन और ट्रैफिक बढ़ा है। दिनों दिन इसमें वृद्धि होनी है। इसलिए ट्रैफिक लोड के आकलन के साथ प्रमुख चौराहों की री-डिजानिंग जरूरी है ताकि सुरक्षित सफर मिल सके। इसीलिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में बजट का प्रावधान किया गया।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि शहर में व्यवस्थित तरीके से ट्रैफिक संचालन और भविष्य की जरूरत को देखते हुए चौराहों की री-डिजाइनिंग के लिए आरएफपी तैयार हो रही है। इसके आधार पर चयनित निजी फर्म विस्तृत अध्ययन करेगी तब आगे काम होगा।
एसपी ट्रैफिक अकमल खां ने कहा कि बढ़ती वाहन संख्या के हिसाब से यातायात के प्रबंधन की योजना धरातल पर उतरेगी। नगर निगम इसके लिए चौराहों की री-डिजाइनिंग कराने की तैयारी में है। जैसे ही काम पूरे होंगे, शहर की यातायात व्यवस्था में और सुधार होगा।