एलाइजा जांच के पर्याप्त इंतजाम नहीं
बुखार के मरीजों की एलाइजा जांच के पर्याप्त इंतजाम स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। जिला अस्पताल में एलाइजा जांच मशीन से एक बार में अधिकतम 80 सैंपल जांचे जा सकते हैं। लिहाजा, कार्ड टेस्ट में पॉजिटिव मिले सभी मरीजों की प्रतिदिन एलाइजा जांच हो पाना भी मुमकिन नहीं। हर दिन डेंगू के 20 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। इनका बोझ संभालने में भी विभाग के इंतजाम नाकाफी हैं।
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों को भर्ती करने के लिए अब 50 बेड हो गए हैं। तीन सौ बेड अस्पताल में भी 50 बेड का वार्ड बना दिया गया है। मगर मरीजों को भर्ती करने के लिए डॉक्टर और जरूरी स्टाफ विभाग के पास नहीं हैं। जिला अस्पताल में बढ़ते जा रही मरीजों को इलाज मुहैया कराने के लिए जैसे-तैसे स्टाफ जुटाया गया है पर तीन सौ बेड अस्पताल में मच्छरदानी लगे बेड व्यवस्था का मखौल उड़ा रहे हैं।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक डेंगू की जांच की दो तकनीकी हैं। पहला, एनएस-1 कार्ड टेस्ट और दूसरा एलाइजा। कार्ड टेस्ट में फाल्स पॉजिटिव की आशंका रहती है। एलाइजा सटीक पुष्टि करता है। गाइडलाइन के अनुसार आईजीएम एंटीबॉडी पॉजिटिव होने पर ही डेंगू माना जाता है, जो सिर्फ एलाइजा जांच से पता चलता है। इसलिए एनएस-1 कार्ड पॉजिटिव मिलने पर एलाइजा जांच जरूरी है।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि एलाइजा जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने पर ही डेंगू की पुष्टि होती है। निजी अस्पताल अगर किसी को डेंगू पॉजिटिव बताएं तो वह एनएस-1 है या एलाइजा, यह जरूर पता करें। बगैर एलाइजा जांच की पुष्टि के कोई अस्पताल डेंगू का इलाज कर रहा है तत्काल उनकी सूचना दें ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।