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जुर्माने का डर नहीं, धड़ल्ले से हो रहा एनजीटी नियमों का उल्लंघन

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विकास कार्यों की समीक्षा करते डीएम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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जल निगम और सेतु निगम करा रहा शहर में निर्माण कार्य
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अक्तूबर में नगर निगम दोनों विभागों पर लगा चुका है जुर्माना

बरेली। तमाम निर्देश और कार्रवाई के बावजूद प्रदूषण की रोकथाम के लिए निर्माणदायी संस्थाओं की लापरवाही शहरवासियों पर भारी पड़ रही हैं। बीते दिनों बारिश के बाद काफी हद तक सुधरी हाबोहवा की हालत फिर बिगड़ने लगी है, शहर में एक बार फिर प्रदूषण का ग्राफ 250 एक्यूआई के पार जा पहुंचा है। यह स्थिति तब है जब अक्तूबर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम को चेतावनी दे चुका है और सेतु निगम व जल निगम पर जुर्माना भी लग चुका है। कार्रवाई के चलते कुछ दिनों तक एनजीटी के मानकों के तहत काम हुआ मगर अब स्थिति फिर से बदहाल हो रही है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने नगर निगम को चेताया था कि टूटी और खुदी हुई सड़कों का निर्माण जल्द पूरा कर लें। जल निगम और सेतु निगम से कहा जाए कि निर्माण या खोदाई के दौरान एनजीटी के नियमों का पालन करें लेकिन नियमों का पालन तो दूर निर्देशों का खुलेआम मखौल बन रहा है। धड़ल्ले से बगैर ग्रीन कवर के खुदाई का काम जारी है। ट्रंक सीवर लाइन की खुदाई से जहां शहर की सड़कें बर्बाद हो गई हैं, वहीं धूल के उड़ते गुबार से लोगों को सांस संबंधी दिक्कतें होने लगी हैं। धूल से बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अक्तूबर में नगर आयुक्त ने जल निगम व सेतु निगम पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद भी अंधाधुंध खोदाई जारी है। बरेली कॉलेज के सामने और कालीबाड़ी में धूल के गुबार उड़ रहे हैं। यहां खुदी हुई मिट्टी के ढेर खुले में पड़े हैं। इससे लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

धूल से राहगीर और दुकानदार परेशान

अमर उजाला की टीम ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया। कालीबाड़ी, पटेल चौक और चौपुला तक ट्रंक सीवर लाइन के लिए खोदाई का काम होता मिला। यहां सड़कों पर उड़ रही धूल से राहगीर और दुकानदार काफी परेशान नजर आए। जुर्माना लगने के बाद भी धूल उड़ने से रोकने के लिए निर्माण स्थलों पर पानी का सही तरह से छिड़काव नहीं किया जा रहा है। कुछ जगहों पर नाम के लिए छिड़काव होता है, इसी वजह से कुछ ही देर बाद मिट्टी उड़ने लगती है।

विशेषज्ञ बोले- वाहनों का धुएं से ज्यादा धूल बढ़ा रही प्रदूषण

बरेली कॉलेज के एमिरेट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक निर्माण कार्यों को बंद करना सही नहीं है लेकिन उन्हें मानकों के तहत कराया जाना बेहद जरूरी है। अगर, खोदाई या सड़क निर्माण कार्य चल रहा है तो वहां पर ग्रीन कवर होने के साथ ही, निर्माण सामग्री के रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए। धूल हवा के साथ न फैले इसके लिए प्रयास करने होंगे। वाहनों के धुएं से ज्यादा धूल के कण एक्यूआई बढ़ा रहे हैं।

निर्माणदायी संस्थाओं को नोटिस जारी कर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। अगर अव्यवस्था रहेगी तो फिर कार्रवाई होगा। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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एनजीटी के नियमों का पालन करते हुए काम करने के निर्देश दिए गए हैं। पानी का छिड़काव भी कराया जा रहा है। -संजय कुमार, एक्सईएन, जल निगम

नगर निगम की एक टीम को जांच करने में लगाया गया है। यदि नियमों का ठीक से पालन नहीं मिला तो कार्रवाई होगी। -अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त

कोरोना का बहाना बर्दाश्त नहीं, होगी कार्रवाई

बरेली। निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार और विभागों में आपसी तालमेल की कमी पर डीएम ने जमकर क्लास ली। उन्होंने अड़चन डालने के बजाए अफसरों को जनहित को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने के लिए सामंजस्य के साथ काम करने का निर्देश दिया। कई अफसरों ने कोरोना के चलते लेटलतीफी का तर्क दिया तो डीएम ने भविष्य में किसी भी तरह की रिपोर्ट या बैठक में कोरोना के चलते कार्य प्रभावित होने की बात कहने पर अफसरों को कार्रवाई की चेतावनी दी।
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ये निर्देश डीएम नितीश कुमार ने शनिवार को विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में पहुंचते ही डीएम ने सबसे पहले निर्माण कार्यों की रिपोर्ट जल निगम, सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी से मांगी। ज्यादातर निर्माण कार्य अधूरे होने की रिपोर्ट पर वह नाराज हुए। चौपुला, लाल फाटक ओवरब्रिज, कुदेशिया, किला पुल और सेटेलाइट फ्लाईओवर के पास सड़कों की खराब दशा पर अफसरों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई खबरों का हवाला दिया तो अफसरों ने नकार दिया। तब डीएम ने बहानेबाजी बनाने के बजाय काम करने पर ध्यान देने की नसीहत दी। निर्माण कार्यों के स्थलीय निरीक्षण के लिए गठित कमेटी से रिपोर्ट मांगी तो निरीक्षण न होने पर वह बिफर पड़े। डीएम ने वजह पूछी तो कोई ठोस जवाब नहीं दे सका। जिस पर डीएम ने चेतावनी देते हुए जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने एएनएम सेंटरों की खराब दशा को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही, जिला पंचायत राज अधिकारी को कई सामुदायिक शौचालयों के अपूर्ण होने पर नाराजगी जताई और तेजी से कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिन स्कूलों का सौंदर्यीकरण रह गया है उसे तत्काल पूरा करने को कहा।

75 दिन बाद भी काम पूरा न हुआ तो दर्ज कराएंगे मुकदमा

चौपुला ओवरब्रिज निर्माण की प्रगति रिपोर्ट में भी विभागों के तालमेल में कमी मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने साफ लहजे में अफसरों को समझाया कि फिलहाल 75 दिन का डायवर्जन हुआ है। इस निर्धारित समय में ही काम पूरा करने के निर्देश दिए। 75 दिन बाद भी काम में अधूरापन मिलने पर संबंधित निर्माणदायी संस्था के जिम्मेदार अफसरों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मुकदमा दर्ज कराए जाने की चेतावनी दी। साथ ही, जिन गांवों में रोड नहीं बनी है वहां तत्काल निर्माण शुरू कराने और सुस्ती पर कार्यवाई की चेतावनी दी।

निर्माणदायी संस्थाओं को मानकों के अनुसार और निर्धारित समयसीमा में ही काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। किसी तरह की लापरवाही या ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - नितीश कुमार, डीएम

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