बरेली से फरीदपुर के कई किलोमीटर आगे तक कहीं कई-कई फुट गहरे गड्ढे तो कहीं सड़क ही गायब, जर्जर पुलों के भी दरकने का खतरा
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कई तीव्र मोड़ भी मुसीबत फिर भी नहीं लगाए गए हैं संकेतक
फरीदपुर। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पहले ही काफी खतरनाक था जिसे बारिश ने जानलेवा बना दिया है। बरेली से शाहजहांपुर तक कदम-कदम पर खतरे हैं। गहरे गड्ढों में कमरतोड़ झटके लगना तो तय है ही, तमाम जगह सड़क ही जमीन में धंस गई है। फरीदपुर के दोनों ओर किलोमीटरों तक भीषण गड्ढे हैं लेकिन उन पर पैचवर्क तक नहीं कराया जा रहा है।
लखनऊ-दिल्ली हाईवे के करीब 160 किलोमीटर के सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट पर कई सालों से काम अटका हुआ है। इस बीच हाईवे बुरी तरह खतरनाक हो चुका है। इस पर हो रहे हादसों में लगातार जानें जा रही हैं फिर भी एनएचआई के अधिकारी हाईवे के गड्ढों को भरने के लिए अक्तूबर का इंतजार कर रहे हैं। हाईवे पर चलकर सही-सलामत मंजिल तक पहुंचना पहले ही मुश्किल था। हाल ही में बारिश की वजह से सड़क के पुराने गड्ढे और गहरे होकर पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गए हैं। फरीदपुर की दोनों ओर कई तीव्र मोड़ हैं मगर बेपरवाही की हालत यह है कि उन पर कोई संकेतक तक नहीं लगाया गया है।
गांव जेढ़ और रिलायन्स पंप के बीच जहां गहरे गड्ढों की वजह से सर्वाधिक हादसे होते हैं, उसे भी उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। खंडेलवाल फैक्टरी के पास भी कई बड़े गड्ढे खतरा बने हुए हैं। बीसलपुर रोड पर बने ओवरब्रिज से आगे रोड सिंगल हो जाती है जहां हाईवे का एक तरफ का हिस्सा ढह चुका है, वहां भी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। शाहजहांपुर की तरफ शुरू होने वाले फरीदपुर बाईपास पर बरसात का पानी भरा हुआ है और सड़क टूट चुकी है। यही हाल डिग्री कॉलेज पर बने ओवरब्रिज और भगवानपुर फुलवा पर बने ओवरब्रिज के पास सड़क का का है। यहां ओवरब्रिज के पास कोई सुरक्षा दीवार भी नहीं बनाई गई है।
धंसे हाईवे की मरम्मत होगी बाद में, पहले बनाएंगे टोल प्लाजा
लखनऊ रोड पर गहरे गड्ढों की वजह से झटकों का सफर तो बरेली से ही शुरू हो जाता है लेकिन फरीदपुर के नजदीक पहुंचते ही खतरे बढ़ने शुरू हो जाते हैं। कई जगह सड़क धंसी होने की वजह से सुरक्षित गुजरना मुश्किल है। फिर भी सात सौ करोड़ रुपये में हाईवे बनाने का ठेका लेने वाली कंपनी सड़क की मरम्मत से पहले फरीदपुर के पास टोल प्लाजा का निर्माण कर रही है। शनिवार को यहां सीमेंटेड सड़क की मरम्मत शुरू कर दी गई। अधूरी सड़क को पूरा करने के लिए मिट्टी डालकर उसे फिलहाल समतल किया जा रहा है। बाद में गिट्टी डालकर सड़क का निर्माण शुरू किया जाएगा।