शासन-प्रशासन से उम्मीद छोड़ चुके ग्रामीणों की मेहनत रंग लाने लगी है। चंदा और श्रमदान से बरौर नदी पर टेहरा बांध बनाने की उनकी कोशिश परवान चढ़ रही है। सोमवार से शुरू हुए काम के दूसरे दिन 24 से अधिक गांवों के सैकड़ों लोग कारसेवा में जुट गए। अब रात में भी काम शुरू हो गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी लहलहाती फसलों को अब भरपूर पानी मिलेगा।
पहले दिन एसडीएम कुंवर पंकज और सिंचाई विभाग के अफसर भी हौसला बढ़ाने पहुंचे थे। उन्होंने दान और श्रमदान का एलान भी कर दिया। मंगलवार को यहां हाथ बढ़ाने वालों का तांता लगा रहा। युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है। जय जवान जय किसान के उद्घोष के साथ कई गांवों के लोग दिन और रात कारसेवा में जुट गए हैं। जो नहीं आ पा रहे हैं उन्होंने राशन पहुंचा दिया है। कारसेवकों के लिए खिचड़ी बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बांध को बनाने में सरकार को दो महीने का समय लगता और करोड़ों का खर्च होता उसे कम समय में बनाया जा रहा है। दान पात्र में अब तक लगभग पचास हजार रुपये जमा हो चुके हैं। ग्रामीण बृहस्पतिवार की सुबह तक बांध का निर्माण पूरा करने का दावा कर रहे हैं। किसानों ने बांध की सुरक्षा के लिए प्रशासन से भी गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग नहरों, गूलों की सफाई कर तत्काल बांध से जोड़ने का काम शुरू करे ताकि पानी को व्यवस्थित रूप से खेतों तक पहुुंचाया जा सके। उधर, ग्रामीणों की मदद को राजनीतिक दल भी आगे आने लगे हैं। बसपा प्रत्याशी नसीम अहमद ने 25 हजार, जिला पंचायत सदस्य समीरउद्दीन खां ने ट्रैक्टरों और जेनरेटर का डीजल खर्च देने की बात कही है।
इसलिए एकजुट हुए ग्रामीण
1989 में आई बाढ़ के चलते बरौर नदी पर बना टेहरा बांध बह गया था। किसान परेशान थे। आर्थिक नुकसान झेल रहे थे। बहेड़ी और मीरगंज के किसान बांध को बनाने के लिए सिंचाई विभाग के अफसरों से लेकर शासन प्रशासन तक फरियाद कर रहे थे। हर बार आश्वासन मिलते रहे। इस बार ग्रामीणों ने पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार की अगुवाई में किसान कल्याण समिति बनाई। समिति के सदस्य पिछले साल से घर-घर जाकर खाली कट्टे और चंदा जमा करने में जुट गए। सोमवार को कई गांवों के लोग यहां पहुंचे और कार सेवा में शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि बांध करीब 50 मीटर लंबा बनेगा। 24 से अधिक गांवों की प्यासी जमीनों को पानी मिलेगा। नहर विभाग की इस पांच एकड़ जमीन में पानी जमा किया जाएगा। उसके बाद इससे नहरों को जोड़कर पानी छोड़ा जाएगा।
इन गांवों को होगा फायदा
मिर्जापुर रंजीत, खिजरपुर, लालूनगला, सुलतानपुर, बुझिया, सैजनी, सियाठेरी, पुनुनागर, मवई जरैल, बड़ौरी बड़ौरा, नौगंवा, राठ, टेहरा, मसमासी, खेमपुर, रूस्तमनगर, मानपुर,भोजपुर, टांडामीननगर, परेवा, परशुरामपुर, बनईया, सुकटिया आदि।