ट्रांसफर होने के चलती सस्ती बाइक बेचने के नाम पर कई को लगा चुके हैं चूना
बरेली। आम जनता में सेना की साख का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को चूना लगा रहे हैं। ट्रांसफर का हवाला देकर कभी बाइक तो कभी ट्रैक्टर बेचने का झांसा देकर ठग अब तक कई लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं। जिले के थानों में इस तरह के दर्जन भर से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
बिथरी चैनपुर के गांव बेनीपुर निवासी किसान बरकत अली ने पिछले साल फेसबुक पर एक ट्रैक्टर बिकने का विज्ञापन देखा। उस पर दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो ट्रैक्टर बेचने वाले ने खुद को फौजी बताया। कहा, भाई से विवाद के कारण वह ट्रैक्टर दो लाख रुपये में बेच रहा है। बरकत अली ने साक्ष्य मांगे तो आरोपी ने सेना का आईडी कार्ड और ट्रैक्टर का फोटो भेज दिया। विश्वास में आकर बरकत अली ने दो लाख रुपये उसके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया।
सीआरपीएफ कर्मी बनकर की ठगी
पिछले साल अगस्त महीने में सुभाषनगर के गांव करेली निवासी मुन्ने खां ने ओएलएक्स पर एक पुरानी बाइक का विज्ञापन देखकर उस पर दिए नंबर पर फोन किया। बाइक बेचने वाले ने खुद को कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ का जवान मुकेश गुप्ता बताया। 32 हजार रुपये में बाइक का सौदा हुआ तो उसने 20 हजार रुपये एडवांस मांगे। कहा, 20 हजार देने के बाद वह बाइक भेज देगा, बाकी रुपये बाद में दे देना। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपये भेज दिए तो आरोपी ने फोन बंद कर लिया।
कैश ऑन डिलीवरी को दें प्राथमिकता
साइबर विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल का कहना है कि सेना देश की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है, जिसके कारण लोगों का उससे भावनात्मक लगाव होता है। बात जब किसी सैनिक की आती है तो लोग सहज ही उस पर भरोसा कर लेते हैं। साइबर ठगी इसी का फायदा उठाते हैं। मगर ऐसे मामले में सोच समझकर निर्णय लेने की जरूरत होती है। जब तक किसी व्यक्ति से आपका व्यक्तिगत परिचय न हो ऑनलाइन सौदा करते समय रुपये ट्रांसफर न करें। ऐसे मामलों में कैश ऑन डिलीवरी को प्राथमिकता दें।