फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाइजीरियन किराये के अकाउंट से करा रहा था साइबर ठगी, धंतिया का साथी गिरफ्तार

विज्ञापन
पकड़ा गया आरोपी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन

तीन लाख रुपये, 15 एटीएम कार्ड, कई पासबुक, चेकबुक और आठ मोबाइल बरामद
विज्ञापन

गैंग के सरगना नाइजीरियन ठग समेत छह साथी फरार, बारादरी पुलिस ने की कार्रवाई

बरेली। नाइजीरियन ठग जैक का गिरोह फर्जी आधार कार्ड के जरिये बैंक अकाउंट खुलवाकर देश-विदेश में बैठे लोगों से साइबर ठगी कर रहा था। बारादरी पुलिस ने फतेहगंज पश्चिमी के गांव धंतिया निवासी साजिद खान को गिरफ्तार कर इस गैंग का खुलासा कर दिया है। उसके कब्जे से तीन लाख पांच हजार रुपये, 15 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक, छह चेकबुक, आठ मोबाइल, एक टैबलेट और डायरी बरामद की गई है।
साजिद खान ने पुलिस को बताया कि गैंग के लोग जान पहचान के लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी आधार कार्ड समेत अन्य आईडी बनवाकर विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाते हैं। इसके बाद गैंग के अन्य सदस्य नाइजीरियन जैक की मदद से देश-विदेश में लोगों से साइबर ठगी कर रुपये इन खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। बाद में रकम खाते से निकालकर सभी को हिस्सा दे दिया जाता है।
विज्ञापन

बकौल पुलिस, साजिद ने गैंग का सरगना नाइजीरिया के जैक को बताया है और धंतिया निवासी जाबिर उर्फ कल्लू, मोबीन खां, वारिस खान, राशिद खान और शाही के गांव दौली के इरफान उर्फ इरशाद व मुस्तकीम को इस गैंग में शामिल बताया है। ये सभी फरार हैं। खुलासा करने वाली टीम में श्यामगंज चौकी इंचार्ज अजय शुक्ला, हेड कांस्टेबल मेहर सिंह और सिपाही कपिल शामिल हैं।

20 हजार रुपये बैंक खाते का किराया

पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि जिन लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये तक दिए जाते थे। यही वजह है कि ये लोग कभी मुंह नहीं खोलते और साइबर ठगी का धंधा जारी रहता है। अब पुलिस इन लोगों को भी ट्रेस करने में लगी हुई है। इसके अलावा इनकी ठगी के शिकार हुए लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

व्हाट्सएप के जरिये होती थी बात

पुलिस की पूछताछ में साजिद ने बताया कि नाइजीरिया से जैक और उन लोगों के बीच व्हाट्सएप के जरिये बातचीत होती थी। उन लोगों ने कभी फोन पर बात नहीं की। इसी वजह से वे लोग सालों से बेखौफ होकर धंधा चला रहे थे और पुलिस की पकड़ में नहीं आए।

यूपी-उत्तराखंड में खुलवाए खाते, हर खाते से रोजाना एक लाख का लेनदेन

साजिद के मुताबिक वे लोग फर्जी आधार से जो बैंक खाते खुलवाते थे, उसमें अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराते थे। साथ ही उस अकाउंट का एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और नेट बैंकिंग की सारी डिटेल भी अपने पास रखते थे। खुद ही खातों का संचालन कर साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर कर देते थे। यही वजह है कि उन लोगों के कब्जे से इतने सारे एटीएम कार्ड और पासबुक-चेकबुक आदि बरामद हुई हैं। सीओ तृतीय साद मियां खान ने बताया कि इनमें से कुछ बैंक खाते यूपी और कुछ उत्तराखंड में खुलवाए गए हैं। हर दिन एक बैंक खाते से 80 हजार से एक लाख रुपये तक के लेनदेन के सबूत मिले हैं। बाकी जानकारी अभी जुटाई जा रही है।

साइबर ठग गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर तीन लाख रुपये से ज्यादा की नकदी, कई एटीएम कार्ड आदि बरामद किए गए हैं। गैंग के नाइजीरियन सरगना समेत छह अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। साथ ही इनके बारे में और जानकारी भी जुटाई जा रही है। - साद मियां खान, सीओ तृतीय

साइबर ठगों का बड़ा ठिकाना बना धंतिया, पहले पकड़े गए थे 14 ठग

बरेली। फतेहगंज पश्चिमी का गांव धंतिया साइबर ठगों का नया अड्डा बनने के बाद दूर-दूर तक बदनाम हो चुका है। पिछले साल भी पुलिस ने धंतिया से 14 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इन ठगों पर शिकंजा कसने के लिए इनका डाटा एनसीआरबी की वेबसाइट पर अपलोड कर देश भर में इनकी ठगी के शिकार लोग तलाशे जा रहे हैं।
पिछले साल जुलाई में तत्कालीन एएसपी अभिषेक वर्मा ने धंतिया में छापा मारकर साइबर ठगी के बड़े मामले का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने गांव से 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहां से तमाम चेकबुक, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, सिम, फर्जी आधार कार्ड और मर्सिडीज समेत पांच लग्जरी गाड़ियां बरामद की थीं।
विज्ञापन

इस मामले की विवेचना साइबर थाने को सौंपी गई है। गिरफ्तारी के दौरान इन लोगों की ठगी का कोई भी शिकार सामने नहीं आया था। इसको देखते हुए आरोपियों से बरामद सिम, आधार कार्ड आदि को एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) की वेबसाइट पर अपलोड कर देश भर की पुलिस से शेयर किया गया है। ताकि इनकी ठगी के शिकार लोग सामने आ सकें।

इन लोगों पर हुई थी रिपोर्ट

जमशेद खां, यूसुफ खान, आरिफ, अफजाल, आमिर, कैफ खां, ताहिर, साजिद, रफी खां उर्फ मोती, जाहिद खां, राशिद खां, नासिर, वारिस, इरफान, मोबीन, अफसर, मुस्तफा खां, असगर आदि पर रिपोर्ट हुई थी। इनमें से 14 जेल गए थे। दो फरार हैं और दो कोर्ट से गिरफ्तारी स्टे ले आए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें