तीस दिसंबर को सेना भर्ती बोर्ड के कर्नल राजीव दीक्षित ने विश्वेंद्र कुमार, संदीप सिंह, राहुल सिंह, श्याम सिंह, राघवेंद्र उर्फ रिंकू, सुमित कुमार, सचिन कुमार, रोहित शर्मा, अमर यादव, अरुण कुमार और सन्नी दियोल को कैंट थाने की पुलिस को सौंप दिया था। आरोप था कि सभी के निवास प्रमाण पत्र और शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी हैं। पकड़े गए लोगों में से पांच लोगों का लखीमपुर खीरी का पता है। भर्ती होते समय दो ने पीलीभीत जिले का और दो ने बदायूं के पते के प्रमाण पत्र लगाए । एक-एक बरेली और आगरा के पते वाले भी इसमें शामिल हैं। पुलिस ने मुकदमा लिखने के बाद सभी का जेल भिजवा दिया था।
इस मामले के पहले विवेचक दरोगा रामरतन यादव ने छानबीन के दौरान सेना भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाले मेरठ के मास्टर माइंड आदेश गूजर और उसके साथी रिटायर कर्नल का नाम पता कर लिया था, लेकिन इसी बीच प्रभारी निरीक्षक रामवीर सिंह यादव की पैरवी पर विवेचना क्राइम ब्रांच के पास चली गई। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजय चौहान इस मामले की विवेचना कर रहे हैं। कोर्ट उन्हें दो बार आरोपियों का असली पता तलाशने के लिए समय दे चुकी है। हाल ही में आरोपियों का असली पता लगाने के लिए चार दिन का समय दिया गया था लेकिन वह कुछ भी पता नहीं लगा पाए।
बुधवार को एडीजे तृतीय वाणी रंजन की कोर्ट में आरोपी सुमित कुमार, सन्नी दियोल, मोहित कुमार, अरुण कुमार और सचिन की जमानत पर उनके अधिवक्ता वीरेश कुमार शर्मा ने बहस की। उन्होंने कहा कि निवास प्रमाण पत्र बनाने से हमारे मुवक्किलों से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस यह बताए उनके मुवक्किलों का पता फर्जी है तो असली क हां है। कोर्ट ने विवेचक से पूछा तो कोई जवाब नहीं था। इस पर कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर दी। इसी तरह दूसरे आरोपियों की भी जमानत मंजूर हो गई।