बरेली। पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने के बावजूद स्त्रियों की स्थित में कोई बदलाव नहीं आया है। इक्कीसवीं सदी में आकर भी उनकी स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है। यानी उसके तन की ही खूबसूरती देखी जाती है मन की नहीं।
विंडरमेयर में शुरू हुए मिनी थिएटर फेस्ट में मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक ‘रसिक संपादक’ कुछ ऐसी ही कहानी पर आधारित है। इस नाटक की कहानी मुंशी प्रेमचंद की शुरुआती दिनोें के लेखन की है जो उनकी उन कहानियों में से एक है जो कभी मंच पर नही आई। कहानी रसिक संपादक एक व्यंगात्मक कहानी है जो ऐसी मानसिकता को दर्शाती है जो स्त्रियों को लेकर कुछ अलग ही होती है, किंतु इंसान को पता ही नहीं कि खूबसूरती तन की नहीं मन अथवा विचारों की होती है।
रंग विशारद दिल्ली की ओर से मंचित इस नाटक को वीना शर्मा के निर्देशन में मंच पर उतारा गया। मंचन को रोचक बनाने के लिए कहानी के पात्रों को कुछ आस पास के किरदारों के चरित्र का अनुसरण कर मंच पर अभिनीत किया है। इस तरह हास्य और व्यंग के साथ यह नाटक अपना संदेश देने में सफल रहा। डा. गरिमा सिंह के अनुसार रविवार को ‘बूढे ने कहा’ नाटक का मंचन शाम 7 बजे से किया जाएगा।
इस मौके पर एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह, उप श्रमायुक्त अनुपमा गौतम अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। आखिर में डा. ब्रिजेश्वर सिंह ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में चरण कमल जीत सिहं, डा. शालिनी अरोरा, शिवानी रेकी, नवीन कालरा आदि का सहयोग रहा।