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क्यों साहब! दो बोर्ड वाले चहेते की जांच होगी या मुख्यमंत्री सम्मान

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बरेली। दो बोर्ड से परीक्षाएं देने के मामले में दोस्त के बेटे को बचाने के चक्कर में अपनी गर्दन फंसाने के बाद भी डीआईओएस बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है। दोस्त के बेटे की जांच कराने के बजाय उन्होंने उसका नाम मुख्यमंत्री मेधावी सम्मान के लिए प्रस्तावित कर दिया है। यह कार्यक्रम एक और दो सितंबर को लखनऊ में होने जा रहा है जिसके लिए बरेली से भेजी गई सूची में डीआईओएस ने अपने दोस्त के बेटे का नाम भी शामिल किया है। विभाग में अब चर्चा है कि डीआईओएस अब इस मामले में बड़े अफसरों की गर्दन भी फंसाने की तैयारी में हैं।
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यूपी और सीबीएसई बोर्ड दोनों की परीक्षा में एक साथ सम्मिलित होने के इस मामले की जांच को डेढ़ महीने से ज्यादा वक्त तक लटकाए रखने पर डीआईओएस के खिलाफ संयुक्त शिक्षा निदेशक यानी जेडी जांच कर रहे हैं। अपर निदेशक की ओर से सौंपी गई जांच में डीआईओएस डॉ. अचल कुमार मिश्र के खिलाफ दोस्त के आरोपी बेटे अर्पित गंगवार प्रकरण के साथ दूसरे कॉलेजों में हेराफेरी की भी जांच होगी। इसी बीच मुख्यमंत्री मेधावी सम्मान समारोह में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के मेधावियों को सम्मानित करने का फरमान जारी हो गया। डीआईओएस ने 13 मेधावियों के नाम की सूची तैयार की। इसमें नवाबगंज के एसएसटी इंटर कॉलेज के छात्र अर्पित गंगवार का भी नाम है। सम्मान से मेधावी ही सम्मानित हों, इसके लिए शासन ने बाकायदा छात्र और उसके अभिभावक की सहमति/असहमति पर डीआईओएस से संस्तुति मांगी थी। इस पर डीआईओएस की ‘ओके’ विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है। डीआईओएस का पक्ष लेने के लिए उन्हें फोन किया गया लेकिन उन्होंने कॉल ही रिसीव नहीं की।
यह है अर्पित गंगवार प्रकरण
नवाबगंज के एसएसटी इंटर कॉलेज की प्रबंधक गुड्डी देवी और तुलाराम के बेटे अर्पित गंगवार ने इस साल यूपी बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड दोनों की 10वीं की परीक्षा में शामिल हुआ था। अपनी मां के कॉलेज में यूपी बोर्ड परीक्षा में वह जिले में छठे नंबर का टॉपर और सीबीएसई के बेदी इंटरनेशनल स्कूल की परीक्षा में 45 प्रतिशत अंक मिले। अमर उजाला ने इस गड़बड़ी का खुलासा किया तो यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव ने डीआईओएस को जांच सौंपी और उन्होंने जीआईसी के प्रिंसिपल को जांच अधिकारी नियुक्त किया। हालांकि, अब तक जांच चल ही रही है।
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सम्मानित हुआ तो और भी नपेंगे
चर्चा है कि दो बोर्ड से परीक्षा देकर एक में टॉपर तो दूसरे में फिसड्डी रहे अर्पित गंगवार का मामला आईने की तरफ साफ है। लिहाजा, विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को पता है कि जांच का निष्कर्ष क्या है? इसके बावजूद मुख्यमंत्री मेधावी सम्मान के लिए अर्पित गंगवार का नाम सूची में दर्ज करने पर उच्चाधिकारियों के भी फंसने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सम्मानित होने के बाद अगर जांच में अर्पित गंगवार दोषी सिद्ध होगा तो विभाग पर शासन स्तर से गाज गिर सकती है।

हाईस्कूल में यूपी और सीबीएसई दो बोर्ड से एक साथ परीक्षा देने के मामले की जांच चल रही है। लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आने से कार्रवाई नहीं हो सकी है। इन परिस्थितियों में अगर सूची में अर्पित गंगवार का नाम दर्ज है तो उसे हटाया जाएगा। - प्रदीप कुमार, संयुक्त शिक्षा निदेशक
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