बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल में बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था न होने से बुधवार को मरीजाें को सीटी स्कैन और पैथोलॉजी जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना जांच के लौट गए। मरीजों के रक्त सैंपल अंधेरे में लिए गए और फॉर्म मोबाइल टॉर्च की रोशनी में भरे।
बुधवार को सिविल लाइंस द्वितीय उपकेंद्र के तहत अनुरक्षण कार्य सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ। इससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई। आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था न होने से तीन सौ बेड अस्पताल की सीटी स्कैन यूनिट और पैथोलॉजी में अंधेरा हो गया। उपकरण संचालित न होने से मरीजों को इंतजार करना पड़ा। करीब दो से तीन घंटे बाद भी बिजली न आने से सीटी स्कैन जांच के लिए पहुंचे कई मरीज लौट गए। शाम करीब साढे़ चार बजे आपूर्ति शुरू हुई। स्टाफ के मुताबिक बुधवार को 19 मरीजों की जांच हुई। जबकि रोजाना 50 से ज्यादा सीटी स्कैन जांच हो जाती हैं।
वहीं, पैथोलॉजी संबंधी 72 मरीजों के रक्त सैंपल हुए। बिजली न होने से सैंपल सुरक्षित कर लिए गए। जांच रिपोर्ट बृहस्पतिवार को मिलेगी।
दूरदराज से आए बुजुर्ग और महिला मरीज हुईं परेशान
धौराटांडा निवासी 67 वर्षीय महिला सिरदर्द से परेशान थीं। सीटी जांच के लिए सुबह साढ़े दस बजे अस्पताल पहुंची थीं। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद लौट गईं। नवाबगंज निवासी सलमा अपनी 63 वर्षीय सास की पीठ दर्द के चले स्पाइनल सीटी कराने सुबह 11 बजे पहुंची थीं। दोपहर दो बजे तक जांच नहीं हो सकी। भोजीपुरा के हसीम अपनी 69 वर्षीय मां के सिर का सीटी स्कैन कराने आए थे। चार घंटे इंतजार के बाद लौट गए।
बार-बार भेज रहे रिमाइंडर पर नहीं हो रही व्यवस्था
अस्पताल प्रभारी डॉ. इंतजार हुसैन ने कहा कि सीटी स्कैन यूनिट में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधी एजेंसी की है। उन्हें कई रिमांइडर भेजने पर भी अब तक व्यवस्था नहीं की है। उच्चाधिकारियों को सूचना दे दी गई है। तीन सौ बेड अस्पताल के जेनरेटर खराब हैं। ठीक कराने के लिए बजट की जरूरत है। अस्पताल का स्वतंत्र बजट न होने से अड़चन है। जिनकी जांच नहीं हुई उन्हें बृहस्पतिवार को बुलाया है।