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पशुओं से क्रूरता : पहले अनदेखी और अब 60 घंटे बाद भी जांच शुरू नहीं हुई

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बरेली। परंपरा के नाम पर लाठी-डंडे लेकर भैंसे घेरे गए फिर उन्हें लड़ने पर मजबूर किया गया। पशु क्रूरता की दो नवंबर को परंपरा के नाम पर हुई इस लड़ाई के 60 घंटे बाद भी जांच-पड़ताल शुरू नहीं हो पाई है। पशु पालन विभाग के अधिकारी कार्रवाई के लिए शासनादेश तलाश रहे हैं, जबकि ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पशु क्रूरता अधिनियम लागू है। उल्लंघन दंडनीय है। ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर अधिकारियों को कार्रवाई करनी थी। इसके उलट कागजी कार्यवाही और निर्देश पर निर्देश का सिलसिला चालू है।
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भैंसों की यह लड़ाई दो नवंबर को गोवर्धन पूजा के मौके पर शहर के कैंट इलाके में कराई गई थी। आयोजन से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कौन लाठी लिए है और कौन पशुओं को लड़ने के लिए मजबूर कर रहा है, यह सबको साफ-साफ दिख रहा है। खुद लेखपाल ने इस आयोजन में जीते और हारे लोगों के नाम अपनी स्थानीय आख्या में दिए हैं। इसके बाद भी अधिकारी सख्त कार्रवाई की जगह टालटटोल करते रहे। नतीजा, कार्रवाई नहीं हुई। अब पशु प्रेमियों ने आवाज उठाई तो अधिकारियों ने संज्ञान लिया और डीएम ने लेखपाल को भेजकर आयोजन की पुष्टि तीन नवंबर को कराई। इसके बाद जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए।
डीएम रविंद्र कुमार सिंह के निर्देश और आयोजन के तीसरे दिन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघश्याम जांच के लिए टीम बना पाए। सोमवार को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। आदेश में कहा गया है कि जांच समिति आयोजकों की जिम्मेदारी तय करते हुए तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। उप मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी सदर डॉ. ओपी वर्मा, उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी मुख्यालय डॉ. मोनिका गुप्ता और क्यारा के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. राजेश समिति में शामिल हैं। कैंट के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार समिति को सहयोग देंगे। जांच समिति ने पहले दिन कोई कार्रवाई नहीं की। समिति में शामिल डॉ. ओपी वर्मा ने कहा कि वह सोमवार को बरेली से बाहर गए थे। इसलिए जांच शुरू नहीं हो सकी। मंगलवार को जांच के लिए सभी सदस्य एक साथ जाएंगे।
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जांच समिति इन बिंदुओं पर करेगी जांच
आयोजन किसने कराया और कितने पशु शामिल हुए। कितनी देर चला आयोजन, किसके पशुपालक के पशु प्रथम व द्वितीय रहे। किसने पुरस्कार का वितरण किया। आयोजन परंपरागत है तो कितनी पुरानी परंपरा है और पहले कभी कोई कार्रवाई हुई है क्या।

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घटना का संज्ञान लिया है और कार्रवाई हर हाल में होनी चाहिए, क्योंकि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम -1960 की धारा 11 (1 एम) के तहत पशुओं को घेरकर लड़वाना अपराध है। अगर दोष सिद्ध होता है तो तीन महीने तक की सजा और 100 रुपये का जुर्माना है। अगर कोई पशु घायल हुआ है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 लगेगी। इसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। - विकेंद्र शर्मा, पशु प्रेमी एवं भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की ओर से नियुक्त मानद पशु कल्याण अधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
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