बरेली। बार-बार आतंकवादियों की धमकी के कारण त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा नए मानकों के आधार पर की जाएगी। इसके लिए नए निर्देशों का इंतजार है, जो कि फरवरी के अंत तक आ जाएंगे। फिलहाल जो संकेत मिले हैं कि उनके अनुसार त्रिस्तरीय सुरक्षा होगी। नए निर्देश के बाद तो रिंग रोड हर हाल में बनेगी। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी राजस्व परिषद के अध्यक्ष के आठ फरवरी के दौरे के बाद कवायद करेंगे।
सुरक्षा के लिए नई गाइड लाइन आने तक पुराने निर्देशों के आधार पर एयरबेस की सुरक्षा सख्ती से की जा रही है। रिंग रोड का निर्माण कराने के बारे में फिर निर्देश आ गए हैं, जिसके आधार पर डीएम के स्तर पर जल्द ही वायु सेना के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। रिंग रोड को जमीन के अधिग्रहण के लिए भी किसानों के साथ बैठक कराई जाएगी।
जिला प्रशासन ग्रामीणों के सुझाव पर इस तर्क के साथ सहमत हो गया है कि रिंग रोड बनाने में जहां-जहां जमीन कम होगी, वहां के लिए किसानों से खरीदी जाएगी। किसान भी सर्किल रेट से कुछ अधिक रकम लेकर सेना को अपनी जमीन रिंग रोड को देने के लिए तैयार हो गए हैं। इस बारे में जल्द ही डीएम वायुसेना के अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठक करेंगे।
प्रशासनिक स्तर पर तैयार किए गए प्लान के अनुसार सिविल डिफेंस और जिला प्रशासन फरवरी के आखिरी और मार्च के पहले सप्ताह में प्रतिबंधित इलाके का चिह्नांकन करेगा। प्रशासन ने फैसला लिया है कि 100 मीटर, पांच सौ मीटर और नौ सौ मीटर क्षेत्र का चिह्नांकन कराकर चारों तरफ बोर्ड लगाए जाएंगे। यह जिम्मेदारी बीडीए, नगर निगम और तहसील स्टाफ की सौंपी गई है।
सिविल डिफेंस ग्रामीणों से समन्यव स्थापित करने के लिए टीम तैयार करेगी। जिसे आपात स्थिति में आतंकियों के हमले से निपटने का प्राथमिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सिविल डिफेंस 250 युवाओं का चयन करेगी। जिनका पूरा ब्योरा सेना, प्रशासन और पुलिस के पास रहेगा।
दूरसंचार नेटवर्क सर्विलांस की जद में
त्रिशूल एयरबेस के आसपास दो किलोमीटर तक लैंडलाइन फोन और मोबाइल नेटवर्क को सर्विलांस की जद में शामिल कर लिया है। इस क्षेत्र में जो भी मोबाइल कॉल होंगी उनका रिकार्ड सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर उसके आधार पर पड़ताल की जा सकेगी। यह सब सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
‘त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को रिंग रोड बननी हैं। जहां पर जमीन नहीं है, वहां के बारे में एयरफोर्स के अधिकारियों से वार्ता की जानी है। आखिर वह किस तरह से किसानों की जमीन चाहते हैं। देश की सुरक्षा का मामला होने के कारण इसे प्राथमिकता से लिया जा रहा है।’ गौरव दयाल, डीएम