थाना प्रेमनगर की जनकपुरी में रहने वाले शिक्षिका के 22 वर्षीय बेटे अंश कुमार की लाश किचन में दुपट्टे के सहारे फंदे पर झूलती मिली। परिवार वाले पड़ोसी पार्षद की छत से होकर अपने घर पहुंचे और लाश को उतारकर निजी अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। आत्महत्या की वजह साफ नहीं हो सकी है।
मंगलवार को मोहल्ला जनकपुरी निवासी शिक्षिका अमर ज्योति छोटे बेटे विपुल कुमार को लेकर दाखिला कराने के लिए गई थीं। शाम करीब चार बजे घर लौटीं तो उनके घर का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो विपुल पड़ोस में रहने वाले नगर निगम के पार्षद आरेंद्र अरोड़ा के पास पहुंच गए। विपुल छत के सहारे अपने घर में उतरा तो भाई को किचन में फंदे पर लटका देखकर उसकी चीख निकल गई। उसके दरवाजा खोलने पर मां भी आ गईं। दादा गोकुल भी घर से बाहर निकले हुई थे। सूचना मिलने पर वह भी घर पहुंच गए। शव को फांसी के फंदे से उतारकर निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही प्रेमनगर थाने के दरोगा अजब सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पंचनामा कराने की कार्रवाई शुरू की तो मां विरोध करने लगीं। उनका कहना था कि वे अंश का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहती हैं। दरोगा ने इस पर इनकार कर दिया। अंश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने के लिए भेज दिया है। प्रभारी निरीक्षक देवेश सिंह ने बताया कि अंश की मौत की वजह का पता नहीं लग पाया है। सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। मामले की छानबीन कराई जा रही है।
दोस्त ने बात करनी बंद कर दी थी
- चर्चा है कि अंश की एक लड़की से बचपन से दोस्ती थी। प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान लड़की से दोस्ती हो गई थी। खुसरो डिग्री कॉलेज से वह बीएससी कर रहा था। थर्ड ईयर में लड़की से उसका ब्रेकअप हो गया। इसलिए उसने पढ़ाई छोड़ दी। लड़की के बात न करने से वह बेहद परेशान रहता था। परिवार वालों ने भी उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने किसी की एक नहीं सुनी।