निजाम बदले तो जागे अफसर, बस अड्डे से हटाया अतिक्रमण
- फोटो : The Nizam, instead of the encroachment, was removed from the premises.
गांवों में कुछ जनप्रतिनिधि किस अंदाज में काम कर रहे हैं इसकी बानगी मंगलवार को बहेड़ी के तहसील दिवस में देखने को मिली। नई सरकार के गठन के बाद पहली बार आयोजित तहसील दिवस में डीएम पहुंचे तो दो प्रधानों की पोल खुल गई। दोनों के फर्जी हस्ताक्षर से काम होता पाया गया तो अफसर भी चकरा गए। एक मामले में महिला प्रधान का देवर और दूसरे में वकील की भूमिका सामने आई। डीएम के आदेश पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। प्रधान के देवर को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। लंबे अर्से के बाद तहसील दिवस हुआ तो फरियादियों की भीड़ भी लग गई। भोजपुर के 30 वर्षीय प्रधान राजीव सिंह पट्टेदारों को कब्जे न मिलने की शिकायत लेकर आए थे। वह अपने साथ वकील कृष्ण औतार शर्मा को लाए थे। वकील से प्रार्थना पत्र लिखने की बात कहकर वह कुछ देर के लिए बाहर चले गए। वापस आए तो दोनों डीएम के सामने पेश हो गए। डीएम ने प्रार्थना पत्र पढ़ा फिर साथ में वकील को देखकर प्रधान से पूछ लिया कि यदि पढ़े लिखे हो तो अकेले आने में संकोच क्यों किया। उन्होंने कहा कि प्रार्थनापत्र में एक हस्ताक्षर और कर दो। डीएम ने पहले और बाद में किए हस्ताक्षरों का मिलान किया तो भिन्नता मिलने पर मूड उखड़ गया। उन्होंने कारण पूछा तो बताया गया कि प्रार्थना पत्र वकील ने तैयार किया है। हस्ताक्षर और मुहर भी उसी ने लगाई है। डीएम ने पहले तो प्रधान की क्लास ली फिर वकील पर बिफर पड़े। उसे जमकर हड़काकर गिरफ्तार करने के आदेश भी दे दिए। इसके बाद डीएम के आदेश पर प्रधान राजीव सिंह से इंस्पेक्टर ने वकील के खिलाफ तहरीर लिखवाई और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। नंदपुर की प्रधान गीता देवी के देवर प्रदीप कुमार भी एक शिकायत लेकर पहुंचे थे। उनका सामना एसडीएम कुंवर पंकज से हो गया। एसडीएम ने गीता देवी के बारे में पूछा तो प्रदीप ने कह दिया कि वह भाभी हैं और घर पर खाना बना रही हैं। हस्ताक्षर के बारे में पूछने पर प्रदीप ने बिना देरी किए कह दिया कि प्रधानी वह खुद चलाता है। मामला डीएम तक पहुंचने पर प्रदीप को उसी समय गिरफ्तार कर थाने भेज दिया गया। उसके खिलाफ भी धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
डीएम ने अफसरों को दिखाए तेवर, कहा-बदल दो आदतें
बहेड़ी। डीएम ने अफसरों को सिस्टम के तहत काम करने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि अब आरामतलबी नहीं चलेगी। हालांकि उनकी मौजूदगी में भी 62 में से सिर्फ एक ही शिकायत का निस्तारण हो सका। ब्लॉक परिसर में हुए तहसील दिवस में डीएम सुरेंद्र सिंह ने सबसे पहले अफसरों से अपने-अपने विभागों की समस्याएं और उनका समाधान लिखकर देने का हुक्म सुनाया। इसके बाद बीएसए चंद्रिका इकबाल यादव की क्लास लेते हुए सात दिन में सिस्टम में सुधार लाने की हिदायत भी दी। बिजली विभाग के एसडीओ से कह दिया कि वह सुविधा शुल्क के चक्कर में बिल गड़बड़ करके भेजते हैं। पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अफसरों से कहा कि उनके जेई और एसडीओ खूब मौज कर रहे हैं। अब यह सब नहीं चलेगा। डीएम ने कहा कि थाने, तहसील, ब्लाक , सप्लाई, शिक्षा विभाग में यदि दलाल अगर दिखाई दिये तो संबधित अधिकारी के साथ-साथ एसडीएम और सीओ भी जिम्मेदार होंगे। डीएम ने नगर पालिका और नगर पंचायतो के ईओ से कहा कि जिन लोगों टैक्स अभी तक जमा नहीं हुए हैं उन्हें सात दिनों की मोहलत देकर टैक्स जमा करों इसके बाद सभी की आरसी जारी कर तहसील भेजा जाए। मुख्य मार्ग और लिंक मार्गों का अतिक्रमण भी सात दिन में हटाने को कहा गया।
तहसील दिवस के बाद डीम ने बहेड़ी, शेरगढ़, दमखोदा के बीडीओ, एडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारियो की बैठक ली। करीब सवा घंटे तक उन्हें सिस्टम का पाठ पढ़ाया। इसके बाद तहसील के स्टाफ और लेखपालों की बैठक में भ्रष्टाचार का चोला उतारकर ईमानदारी का चोला ओढ़ने की नसीहत दी। तहसील दिवस में एसएसपी जुगेंद्र सिंह और सीडीओ शिव सहाय अवस्थी भी मौजूद रहे।