आला हजरत खानदान की बहू निदा खान ने एसपी सिटी कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक बयान दर्ज कराए। बयान में शादी से लेकर अब तक के घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी, उनके बयान को जांच अधिकारी ने छह पन्नों में दर्ज किया है। इस दौरान उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी तो एसपी सिटी ने कहा कि जिस तरह से वह चाहें उनको सुरक्षा प्रदान कर दी जाएगी। उनके बयान के बाद अब निदा के पति शीरान के बयान दर्ज होंगे। एक दो दिन में पुलिस बयान देने के लिए शीरान को एसपी सिटी कार्यालय में तलब करेगी।
शहदाना निवासी निदा खान शाम करीब साढ़े पांच बजे एसपी सिटी कार्यालय पहुंचीं, वहां पर करीब आधा घंटे तक एसपी सिटी ने सामान्य तौर पर घटना की जानकारी की। उसके बाद छह बजे से लेकर सात बजे तक महिला पुलिस अधिक ारी की मौजूदगी में एसपी सिटी समीर सौरभ ने बयान लिए।
इस दौरान निदा ने कहा कि पिछले सप्ताह जिस तरह शीरान ने कोर्ट के बाहर घर जाते समय एसिड अटैक की धमकी के बाद जान को खतरा बताया। ऐसे में उन्होंने शुक्रवार को फिर से एसपी सिटी से सुरक्षा की गुहार लगाई। इस मामले में एसपी सिटी ने कहा कि वह 24 घंटे के लिए दो महिला सिपाही ले सकती हैं। या फिर शहर में कहीं भी किसी भी काम से आएं- जाएं, उस अवधि के लिए नजदीकी थाने से महिला गार्ड ले सकती हैं। निदा ने बताया कि इस मामले में 10 जनवरी को एसीजेएम चतुर्थ और 13 जनवरी को फैमिली कोर्ट में सुनवाई होगी।
औरत का तलाक सुनना जरूरी नहीं
बरेली। मर्द यदि तलाक देता है तो औरत का सुनना जरूरी नहीं। उसे तलाक माना जाएगा। शरीयत के हवाले से इस संबंध में मरकजी दारुल इफ्ता ने फतवा जारी किया है।
इस मुद्दे पर सीबी गंज के मोहम्मद बख्तियार खां ने मरकजी दारुल इफ्ता में सवाल डाला था। उन्होंने मुफ्तियाने इकराम से पूछा था कि क्या फरमाते हैं उलमाए इकराम व मुफ्तियाने इकराम, कि इस मसले में क्या तलाक होने के लिए औरत का सुनना या मौजूद होना अथवा उसका दस्तखत करना जरूरी है। जब कि शौहर तीन तलाक देेने का इकरारी है और औरत तलाक मानने से इकार कर रही है। इस सूरत में शरीयत का क्या हुक्म है। कुरान और हदीस की रोशनी में दो दिन पहले जवाब मांगा था।
जवाब: इस पर मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती मोहम्मद कौसर अली ने अपने जवाब में कहा है कि- अगर कोई शौहर तीन तलाक देने का इकरारी है तो उसकी बीवी पर तीन तलाक मुगलजा वाके हो गई (तलाक हो गई) और बीवी ऐसी सूरत में हराम हो गई। उसे शौहर के पास दुबारा आने के लिए हलाले से गुजरना होगा। क्यों कि औरत का तलाक के अल्फाज को सुनना या तलाक के वक्त मौजूद होना अथवा औरत का तलाकनामे पर दस्तखत करना जरूरी नहीं, और तलाक के वाके होने के लिए माने नहीं है। शौहर का इकरार करना काफी है।