बरेली। रक्षा मंत्रालय को संदेह है कि त्रिशूल एयरबेस के आसपास की बस्तियों में आईएसआई और आतंकियों के स्लीपर सेल हैं। 20 अक्तूबर 2015 को बरेली आए रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने एक टीवी कार्यक्रम में अपने निरीक्षण का जिक्र करते हुए चिंता जताई थी कि एयरफोर्स की दीवार सुरक्षित नहीं है। उन्होंने अवैध निर्माणों को हटाने के मसले पर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस पर भी सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा कि जहां देश की सुरक्षा का मुद्दा हो वहां यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि अतिक्रमणकारी कौन है? वह हिंदू है या मुसलमान। प्रदेश सरकार से इस मसले पर मदद नहीं मिल रही।
मनोहर पर्रिकर बरेली आए थे तो एयरफोर्स के साथ ही कैंट इलाके का भ्रमण कर सुरक्षा का हाल जाना था। तमाम मांगों के बाद भी उन्होंने कैंट के बंद रास्ते न खोलने की सहमति नहीं दी थी। पठानकोट पर हमले के बाद यह साबित हो गया कि एयर फोर्स की दीवारें सुरक्षित नहीं हैं। उसके बाद ही बरेली में भी पुरानी फाइलें टटोली जाने लगीं ताकि अवैध निर्माण हटाए जा सकें। सुरक्षा के मुद्दे पर हीला हवाली का जो जिक्र मनोहर पर्रिकर ने किया है वह बिल्कुल सच साबित हो रहा है। रक्षामंत्रालय के चिंता जताए जाने के बाद ही यहां एयरबेस की सुरक्षा कमांडो के हवाले की गई है। यही नहीं खुफिया विभाग को विशेष निगहबानी के आदेश दिए गए हैं। करीब डेढ़ माह से तमाम बैठकें हो चुकीं, कई आदेश इधर उधर दौड़ रहे हैं...सर्वे का नाटक चल रहा है लेकिन चिह्नांकन नहीं हो पाया कि अवैध क्या है? कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने जरूर शुक्रवार को बीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त को चिट्ठी देककर सर्वे की रिपोर्ट न देने पर नाराजगी जताई है। सोमवार तक का अल्टीमेटम दिया गया है।
कश्मीरियों ने बढ़ाई चिंता
बार-बार एयरफोर्स के आसपास मिल रहे कश्मीरियों को लेकर भी संदेह गहराया लेकिन इसे स्थानीय पुलिस ने हवा में उड़ा दिया। सिर्फ नाम पता तस्दीक किया और छोड़ दिया। जबकि कई आतंकी अपने नाम पते से जहां रह रहे थे वहीं से उन्हें गिरफ्तार किया गया। इजाज भी अपने नाम और पते से ही पूरे आधार कार्ड के साथ यहां रह रहा था। पुलिस के पास इसका जवाब नहीं कि वह आईएसआई के एजेंट क्यों नहीं हो सकते? रक्षामंत्री ने इस रवैये पर भी ऐतराज किया है।
कागजों पर सौ मीटर, हकीकत में पचास मीटर
अफसर यह भी तय कर चुके हैं कि अगर अवैध निर्माण ध्वस्त करने होंगे तो पचास मीटर दायरे में ही हटाएंगे। हालांकि दूसरे फेज की बात कहकर इसे टरकाया ही गया है। एयरफोर्स ने तो सौ मीटर दायरे में बस्तियों को हटाने की बात कही थी लेकिन अंदर खाने चर्चा है कि पचास मीटर के दायरे में ही अवैध बस्तियां हटाएंगे।