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चौकी के पीछे आवास में पेड़ पर लटका मिला एचसीपी का शव

Thu, 14 Dec 2017 02:38 AM IST
बरेली।
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राोते ‌िबबिलख्‍ाते प‌िररिवार के लाोग
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यूपी 100 पीआरवी पर तैनात एचसीपी जगपाल सिंह का शव नरायननगला चौकी के पीछे स्थित उनके किराये के आवास में सुबह पेड़ से लटका मिला। फॉलोअर आवास पर पहुंचा तो लाश लटकी देखकर उसकी चीख निकल गई। एसपी देहात के साथ पहुंची फील्ड यूनिट की टीम ने मौका मुआयना किया। इससे पहले 11 दिसंबर की शाम को भी उन्होंने जान देने की कोशिश की थी। चौकी के सिपाहियों ने सुसाइड की वजह पारिवारिक कलह बताई। हालांकि घरवालों ने इसे नकार दिया। अलबत्ता कुछ समय से जगपाल के डिप्रेशन में होने की बात जरूर कही। जगपाल आठ दिसंबर से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे थे।
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मुरादाबाद में थाना ठाकुरद्वारा क्षेत्र के गांव शेरपुर पट्टी उर्फ तालमपुर निवासी एचसीपी जगपाल सिंह (55) पुत्र जसंवत सिंह 81 बैच के सिपाही थे। दो साल पहले नरायननगला चौकी प्रभारी रहने के दौरान पीछे बने डॉ. सुरेंद्र सिंह का आवास उन्होंने किराये पर लिया था। साल भर से वह यूपी 100 पीआरवी संख्या 187 पर रिछा क्षेत्र में तैनात थे और नरायननगला से ही ड्यूटी करते थे। चौकी के स्टाफ के मुताबिक कई दिनों से वह तनाव में थे। आठ दिसंबर से ड्यूटी से गैरहाजिर भी चल रहे थे। चौकी स्टाफ ने उनके अक्सर शराब पीने की बात भी कही। मंगलवार रात करीब नौ बजे तक वह नरायननगला के तिराहे पर एक होटल में बैठकर शराब पीते रहे। इसके बाद होटल वाले ने ही उन्हें घर तक छुड़वाया। बुधवार सुबह चार बजे तक गश्त पर जाने वाले सिपाहियों ने उन्हें कमरे में देखा था। इसके बाद किसी समय उन्होंने पड़ोसी रामरतन के मकान में खड़े कमरख के पेड़ की अपने आवास में आ रही डाल पर अंगोछा और प्लास्टिक की रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। सुबह करीब साढ़े नौ बजे जब फॉलोअर भूपराम नाश्ता बनाने पहुंचा तो उनका शव लटका देखा। उसने ही चौकी पर जाकर सूचना दी।
सूचना पर सीओ जोगेंद्र लाल और इंस्पेक्टर नरेश त्यागी मौके पर पहुंचे। जगपाल की चप्पलें पास ही छत पर पड़ी मिलीं। पुलिस ने फील्ड यूनिट की जांच के लिए मकान को बंद कर दिया। एसपी देहात ख्याति गर्ग के साथ पहुंची फील्ड यूनिट ने जांच की। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। सूचना पर एसएसपी जोगेंद्र कुमार भी पहुंचे। उन्होंने जगपाल के बड़े भाई पहलवान सिंह, पुत्र विशाल और चचेरे भतीजे कपिल सिंह से पूछताछ की लेकिन उन्होंने गृहक्लेश से इंकार किया। हालांकि यह जरूर कहा कि जगपाल कुछ समय से डिप्रेशन का शिकार थे।
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परिवार के इंतजार में पांच घंटे लटका रहा शव
पुलिस को जगपाल के सुसाइड की सूचना सुबह करीब साढ़े नौ बजे मिली। इसके बाद पुलिस उनके घरवालों का इंतजार करती रही। उनके आने पर दोपहर करीब ढाई बजे शव पेड़ से उतारा गया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

11 दिसंबर को सिपाहियों ने बचा लिया था 
नरायन नगला चौकी इंचार्ज गुरुदेव सिंह ने एसएसपी को बताया कि 11 दिसंबर की शाम को भी जगपाल सिंह ने बरामदे में फांसी लगाने की कोशिश की थी। वह मेज पर चढ़ ही रहे थे कि तभी दूसरे कमरे में सो रहे सिपाहियों की नींद खुल गई और उन्होंने जगपाल को बचा लिया। इसके बाद उनसे रस्सी, आग जलाने के लिए रखा गया मिट्टी के तेल का डिब्बा भी ले लिया गया। एक होमगार्ड को उनकी निगरानी में लगा रखा था। गुरुदेव ने कई बार उनसे तनाव का कारण पूछा लेकिन उन्होंने कभी कुछ नहीं बताया। छुट्टी मिलने पर भी वह घर नहीं जाते थे। सीओ जोगेंद्र लाल ने उनकी काउंसिलिंग भी की थी और एसएसपी को पत्र भेजकर उनके खुदकुशी करने का अंदेशा भी जताया था। जगपाल के शीशगढ़ थाने में सिपाही भतीजे कपिल के जरिये पूरा वाकया उनकी पत्नी और बड़े भाई तक पहुंचाया गया था। जब कपिल चौकी पर मिलने आया तो उन्हाेंने ड्यूटी में होने की बात कहकर वापस भेज दिया था। 

अंतिम बार पत्नी से बात करते हुए रोने लगे थे 
चौकी स्टाफ के मुताबिक, जगपाल ने मंगलवार शाम को पांच बार पत्नी और एक बार बेटे से फोन पर बात की थी। मोबाइल की काल डिटेल के मुताबिक पत्नी से शाम 5:22 बजे करीब 45 मिनट बात की। फोन काटा तो वह फफक-फफक कर रो पड़े थे। साथियों से बच्चों की तारीफ करते थे। अपने बच्चों की तस्वीर देखकर उन्हें याद करके रोते थे।

वर्जन
शव का पंचनामा भरकर पीएम के लिए भेज दिया है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर और साफ हो जाएगी। प्रथम दृष्टया यह सुसाइड का मामला है। वह कई दिनों से ड्यूटी से गैरहाजिर था और बताया जा रहा है शराब पीता रहता था।
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- जोगेंद्र कुमार, एसएसपी
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