असलहा बाबू का कहना है कि उनके पास सिर्फ आठ लोगों की ही फाइलें हैं। उन्होंने पुलिस से ही बाकी पांचों आरोपियों के लाइसेंस नंबर और ब्योरा मांगा है ताकि इन फाइलों को दोबारा तलाश कराया जा सके।
डीआईजी आरकेएस राठौर के आदेश पर बरेली के फर्जी पतों पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में बीसलपुर के गांव मीरपुर वाहनपुर गांव के आबिद हुसैन, सिद्दीक अहमद, साबिर हुसैन, अभयपुर चैना नकटी के रईसउद्दीन खां, मुंशी खां, अताउल्ला खां, मैसर खां, महादेवा के बुंदा खां आदि 13 लोगों के खिलाफ सपा नेता इरशाद खां की तहरीर पर 14 फरवरी को मुकदमा तो दर्ज हो गया लेकिन कार्रवाई के नाम पर अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। विवेचक उपनिरीक्षक यश कुमार ने कलेक्ट्रेट के असलहा बाबू को पत्र लिखकर सभी आरोपियों से शस्त्र लाइसेंस की फाइल की प्रमाणित छाया प्रति मांगी है जो अभी तक मिल नहीं पाई है। विवेचक के मुताबिक असलहा बाबू के पास आठ शस्त्र लाइसेंसों की ही फाइलें हैं। बाकी पांच फाइलों के बारे में उनका कहना है कि वे नहीं मिल रही हैं। असलहा बाबू ने उनसे आरोपियों के लाइसेंस नंबर मांगे हैं ताकि फाइलों को दोबारा तलाश करा लिया जाए। विवेचक ने बताया कि शस्त्र लाइसेंसों की फाइलें मिलने के बाद इस मामले में आगे कोई कार्रवाई हो पाएगी।
पुलिस ने अब तक नहीं भेजी रिपोर्ट
कोतवाली पुलिस ने अभी तक शस्त्र लाइसेंसों के निलंबन कराने संबंधी रिपोर्ट डीएम को नहीं भेजी है। पुलिस को कहना है कि शस्त्र लाइसेंसों की फाइलें मिलने के बाद उन पतों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद ही तय होगा कि लाइसेंस फर्जी पते पर बने हैं। हालांकि इस मामले में एसपी पीलीभीत ने खुद जांच करने के बाद रिपोर्ट डीआईजी को भेजी थी। उन्होंने जांच में पाया है कि शस्त्र लाइसेंस फर्जी पते पर ही बने हैं। उनकी रिपोर्र्ट के आधार पर ही डीआईजी ने कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखाया है। इसके बाद भी पुलिस को कोतवाली पुलिस को यह सुबूत चाहिए कि लाइसेंस फर्जी पते पर बने या नहीं। इसके बाद ही कोतवाली से डीएम को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।