कदम वर्मा जैसा जांबाज न होता तो शायद न पुलिस इज्जतनगर में पंजाब नेशनल बैंक के गेट पर लूट की दुस्साहसिक वारदात करने वाले एक लुटेरे शिवशंकर पांडे को ढेर कर पाती न दूसरे बदमाश चंद्रजीत यादव को पकड़ पाती। यही नहीं, जिले के पुलिस अफसरों के माथे पर भी ऐसा दाग लगता कि जो शायद छुटाए न छूटता। यही वजह थी कि कदम वर्मा की बहादुरी पर खुश अफसरों ने उनके अपनी सुरक्षा की चिंता जताने पर सार्वजनिक रूप से रिवॉल्वर का लाइसेंस दिलाने का वादा किया था, लेकिन बाद में इस वादे से मुकर गए। कदम वर्मा कई साल तक रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए अफसरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन आखिरकार मरते दम तक लाइसेंस हासिल नहीं कर पाए।
तीन जून 2006 को हुई इस वारदात के दौरान पंजाब नेशनल बैंक के पास ही जेनरेटर की दुकान चलाने वाले कदम वर्मा की बहादुरी लोगों को आज भी याद है। बैंक में पैसा जमा कराने आए गोयल गैस एजेंसी के गार्ड सतपाल सिंह की गोली मारकर हत्या करने के बाद तीन लुटेरे मोटर साइकिल पर भाग निकले थे। पास ही आरएसएस कैंप में ड्यूटी कर रहे एचसीपी परशुराम भार्गव मौके पर पहुंचे, लेकिन भागते लुटेरों का पीछा करने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। ऐसे में कदम ने अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्हें अपनी मोटर साइकिल पर पीछे बैठाकर लुटेरों का पीछा किया था। आगे बैठे कदम लगातार लुटेरों के निशाने पर बने रहे, लेकिन फिर भी उनका पीछा बंद नहीं किया। परशुराम भार्गव की गोली से एक लुटेरा शिवशंकर पांडे मारा गया था जबकि दूसरे लुटेरे चंद्रजीत सिंह यादव को पकड़ लिया गया था। तीसरा परवेज भागने में कामयाब हो गया, लेकिन लूटी गई ज्यादातर रकम चंद्रजीत के पास से बरामद हो गई थी।
कदम वर्मा की बहादुरी पर पूरा शहर उनकी मुरीद हो गया। व्यापारी और समाजसेवी संगठनों ने ही नहीं, प्रशासन ने भी उन्हें सम्मानित किया। कदम वर्मा ने अपनी सुरक्षा की चिंता जताई तो अफसरों ने सार्वजनिक रूप से उन्हें रिवॉल्वर का लाइसेंस देने का वादा किया, लेकिन जैसे ही कुछ समय बीता, इस वादे से मुकर गए। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए चिंतित कदम वर्मा कई सालों तक अफसरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन लाइसेंस नहीं मिल पाया। बाद में वह बीमार हो गए, तब भी प्रशासन या पुलिस से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। करीब पांच साल पहले मल्टी ऑर्गंस फेल्योर की वजह से उनकी मौत हो गई।
ऐसे हुई थी वारदात
तीन जून, 2006 की सुबह गोयल गैस एजेंसी के गार्ड सतपाल सिंह 3.89 लाख रुपये बैग में लेकर टेंपो से इज्जतनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जमा करने निकले थे। मुनीम राजू पीछे-पीछे स्कूटर पर थे। बैंक के गेट पर गार्ड से रुपयों का बैग मुनीम राजू ने ले लिया। राजू बैंक की ओर बढ़े ही थे कि तीन लुटेरे ने बैग छीन लिया। सतपाल ने बंदूक से फायर किया तो पास ही खड़े लुटेरे ने उन्हें अपनी पिस्टल से गोली मार दी। सतपाल की वहीं मौत हो गई। पास ही दुकान चलाने वाले सीबीगंज के गांव खलीलपुर निवासी कदम वर्मा घटना देखकर बाहर दौडे़। लुटेरे बाइक से भागे तो कदम वर्मा भी एचसीपी परशुराम भार्गव को बाइक पर बैठाकर उनके पीछे दौड़ पड़े। भार्गव ने सिद्धार्थनगर के सूना लाज निवासी शिवशंकर पांडे को मौके पर मार गिराया। कौशांबी निवासी दूसरे लुटेरे चंद्रजीत यादव को पकड़ लिया गया। मौके पर पहुंचे तत्कालीन सीओ सिटी समीर सौरभ ने चंद्रजीत से पूछताछ कर, उस मकान से नकदी बरामद कर ली, जहां वे किराये पर रहते थे।
परवेज को 11 साल में भी नहीं पकड़ पाई पुलिस
कदम वर्मा की बहादुरी की वजह से एक लुटेरा शिवशंकर मारा गया और दूसरा चंद्रजीत पकड़ा गया। इस वारदात में शामिल तीसरा लुटेरा नेपाल निवासी परवेज था जिसे पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई। पुलिस ने लूट की वारदात के बाद कुछ समय तक तो उसकी तलाश की, लेकिन फिर खामोश होकर बैठ गई। यहां तक कि पुलिस उसका सटीक पता तक मालूम नहीं कर सकी।
एचसीपी परशुराम और दो सिपाहियों को मिला था प्रमोशन
कदम वर्मा की मोटर साइकिल पर उनके पीछे बैठकर एक बदमाश को मार गिराने वाले एचसीपी परशुराम भार्गव और बदमाशों का लगातार पीछा करने वाले सिपाही नारायण सिंह और श्रीपाल यादव को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था। तब शहर में सीओ सिटी रहे समीर सौरभ अब एडिशनल एसपी हो चुके हैं और पीएसी, 34वीं वाहिनी बनारस में तैनात हैं। घटना के बाद कदम को भी तमाम मंचों पर सम्मानित किया गया।
दुख है कि अफसरों ने मेरे भाई से किया वादा नहीं निभाया
अफसरों के वादे पर एतबार करके सालों तक रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए चक्कर काटने पर कदम वर्मा के बड़े भाई एएस वर्मा को आज भी अफसोस है। पार्लियामेंट में सिक्योरिटी ऑफीसर एएस वर्मा कहते हैं कि कदम को बहादुरी के इनाम के तौर पर सिर्फ अफसरों से वादे ही मिले। इस कार्यवाही में शामिल पुलिस वालों को तो सम्मान मिला लेकिन उनका भाई लाइसेंस के लिए भटकता रहा। उन्होंने बताया कि करीब पांच साल पहले कदम बीमार हो गए। मल्टी ऑर्गन फेल्योर के बाद 27 दिन आईसीयू में रहे और फिर मौत हो गई। मगर कोई अफसर न उन्हें देखने आया न उनकी कोई मदद की। कदम के पिता वीएस वर्मा, पत्नी प्रभा और दो बेटे राजा व श्लोक अब खलीलपुर में रहते हैं।
कदम वर्मा ने बहुत बहादुरी दिखाई थी। उन्हें उस दौरान पैसे इकट्ठे करके दिलवाए गए थे। रिवॉल्वर के लाइसेंस का तो मुझे नहीं पता, लेकिन अगर उनकी बीमारी का पता लगता तो मैं जरूर मदद करता।
- समीर सौरभ, तत्कालीन सीओ सिटी