तीन जून को तारीख पर कचहरी से निकलते ही कालीचरण ने शेर सिंह की हत्या की प्लानिंग कर ली थी। उसने अपने छोटे बेटे को दफा 25 में गिरफ्तार कराकर जेल भेज दिया था। इसके पीछे साजिश यह थी कि वह जेल में होगा तो इस केस में नाम नहीं आएगा और आजाद होकर शेर सिंह हत्याकांड के मुकदमे की पैरवी कर सकेगा।
थाना बिथरी चैनपुर के तय्यतपुर गांव निवासी शेर सिंह की उम्र भले ही अधिक हो गई थी लेकिन रंजिश के बाद भी वह डरता नहीं था। वर्चस्व की लड़ाई में दो बेटों को खोने के बाद भी वह खुलेआम बिना किसी सुरक्षा के रहता था। शेर सिंह के चार बेटों में बड़े बेटे जापान सिंह बरेली शहर में रहकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। मुरादाबाद में पॉवर कॉरपोरेशन के ऑफिस में वह काम भी करते हैं। दूसरे बेटे संतोष की हत्या हो चुकी है। तीसरे नंबर का जगवेंद्र पटेल फोटोग्राफर है और बरेली में रहकर एक समाचार पत्र में नौकरी कर रहा है। सबसे छोटे बंटू की 23 मई 2009 को हत्या होे गई थी। बेटों के नौकरी के लिए घर छोड़ने के बाद से शेर सिंह अकेले रह गए थे। उनकी पत्नी प्रेमवती के अलावा संतोष की पत्नी सोमवती, संतोष की 11 वर्षीय बेटी मोनी, 9 वर्षीय सोनी और छह साल का बेटा सक्षम शेर सिंह के साथ ही रहते थे। 29 सिंतबर 2012 को संतोष की गांव में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में कालीचरन के अलावा उनके दोनों बेटे मुनेंद्र, कुशेंद्र और चचेरे भाई रूम सिंह को शेर सिंह ने नामजद किया था। कालीचरन ने सेटिंग करके किसी तरह से पुलिस से अपना नाम निकलवा लिया था, लेकिन बाकी लोगों को जेल जाना पड़ा था। मुनेंद्र मुख्य अभियुक्त होने की वजह से जेल में हैं। बाकी अभियुक्त जमानत पर हैं। लेकिन शेर सिंह को इसका जरा भी डर नहीं था। कालीचरन के मुकदमा वापस लेने की धमकी देने के बाद भी शेर सिंह खुले में सोते थे। शुक्रवार की रात को भी वह आंगन में ही सो रहे थे। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करनी शुरू कर दी है। गवाही चल रही हैं, तीन जून को तारीख थी, आठ जून को गवाही होने थी। इसी बीच कालीचरन और उसके साथियों ने शेर सिंह की प्लानिंग कर रखी थी। यह प्लानिंग का ही हिस्सा था कि कालीचरन ने अपने बेटे कुशेंद्र को दफा 25 में जेल भिजवा दिया था। शेर सिंह की हत्या से पहले दिन में कालीचरन और उसके साथी धमकाने के लिए आए थे। हत्यारोपी जानते थे कि शेर सिंह खुले में सोता है इसलिए आती हे अंधाधुंध गोलियां बरसाने लगे। संयोग था कि उसके आसपास कोई और नहीं था वरना उसकी जान भी जाती।
बाजार के ठेके का विवाद भी था
बरेली। संतोष और कालीचरन के बेटे मुनेंद्र में मामूली बात को लेकर मारपीट होने के बाद भुता के बाजार के ठेके को लेकर रार बढ़ गई थी। इसी दुश्मनी में बात बढ़ती गई। पहले संतोष की हत्या की गई और अब उसकी हत्या के मुकदमें की पैरवी करने से परेशान होकर उसके पिता को मार डाला।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बिथरी चैनपुर से भुता को जाते वक्त संतोष पटेल का मैजिक में ही सवार युवक से विवाद हो गया। लड़के की पैरवी में मुनेंद्र आ गया था। दोनों में इस बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। ग्राम पंचायत भुता के बाजार का ठेका संतोष के पास रहता था। विवाद होने पर मुनेंद्र ने बाजार के ठेके में टांग अड़ा दी थी। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद और बढ़ गया। लेकिन कुछ लोगों ने बैठकर बाद में समझौता करा दिया था। इसी बीच संतोष के मर्डर के दस दिन पहले किसी ने मुनेंद्र से कहा कि संतोष ने तुम्हें चौबीस घंटे में मारने की धमकी दी है। उसने इसी धमकी के बाद संतोष को खेत से लौटते समय रास्ते में गोली मारकर हत्या कर दी।