क्राइम कंट्रोल करने के लिए चीता मोबाइल के सिपाहियों को नए तरीके से प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है। चीता मोबाइल के सिपाही अब हेलमेट पहनकर ही चलेेंगे। उनके पास भारी भरकम रायफल नहीं होगी। वे पिस्टल लेकर चलेंगे। तीन मिनट में पुलिस मौके पर पहुंचेगी। उन्हें इसके लिए दी जा रही तीन दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम का डीआईजी आशुतोष कुमार ने उद्घाटन किया।
डीआईजी ने बताया कि गश्ती वाहन चीता मोबाइल, क्यूआरटी मोबाइल, रक्षक मोबाइल व वज्र मोबाइलों को प्रभावी बनाने के लिए व्यापक संशोधन किया जा रहा है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सभी को पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल मौके पर पहुंचकर इन मोबाइल को कार्रवाई करने की तकनीकि के बारे में समझाया जाएगा। उन्हें प्रभावी गश्त करने, बल प्रयोग करने, प्राथमिक चिकित्सा, आधुनिक हथकड़ी का प्रशिक्षण गिरफ्तारी करने को प्रशिक्षण दिया जाएगा। एसएसपी आरके भारद्वाज ने कहा कि बुजुर्ग सिपाही अब चीता मोबाइल पर ड्यूटी नहीं करेंगे। एसपी क्राइम को हमने 2011, 12 और 13 के सिपाहियों की चीता मोबाइल चलाने को लेने के लिए लगाया है। मोबाइल में रहने वाले सिपाहियों को जूडो कराटे भी सिखाया जाएगा। सिपाहियों को यह भी सिखाया जा रहा है कि वह दबिश के दौरान अपराधियों पर किस तरह से काबू करें। चीता मोबाइल की ड्यूटी समयवार निर्धारित कर दी गई है। इनके अतिरिक्त शहर में 18 रक्षक मोबाइल चलेंगी। रक्षक मोबाइल चार पहिया वाहन में रहेगी। इसमें एक एसआई, एक एचसीपी, एक सिपाही और दो महिला आरक्षी एक होमगार्ड रहेगा।
ये सामान मोबाइल वाहनों पर रहेंगे
-इन मोबाइल वाहनों पर स्पेशल डिजाइन हेलमेट, आधुनिक हथकड़ी, हैंडसेट, एचवी जैकेट, पिस्टर मय होल्डर, बॉडी प्रोटेक्टर, ड्रेगन लाइट कैमरे, हथकड़ी रस्से आदि रहेंगे।