फतेहगंज पश्चिमी प्रकरण में भाजपा की जांच रिपोर्ट में कप्तान पर हमले के बाद सपा खुल कर एसएसपी के बचाव में आ गई है। जांच के नाम पर सपा ने भी रविवार को ड्रामा किया और जांच कमेटी के नेताओं को सीबीगंज में रोके जाने के बाद फतेहगंज पश्चिमी के नेताओं की ही रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जा रही है। दिलचस्प यह रहा कि कमेटी में शामिल तीन नेता मीरगंज क्षेत्र से पहले बरेली आए और फिर बरेली से फतेहगंज के लिए रवाना हुए। पुलिस ने उन्हें सीबीगंज में रोक लिया और थाने पर चाय पिलाई। पूरी कवायद को सपा के डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
शनिवार को भाजपा का संसदीय दल परसाखेड़ा में रोका गया था। उसके बाद भाजपा नेताओं ने मामले में एसएसपी और पुलिस प्रशासन का दोष बताते हुए प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट भेज दी थी। इसके बाद शनिवार की शाम सपा ने पार्टी पदाधिकारियों की पांच सदस्यीय जांच कमेटी बना दी थी। कमेटी में महानगर अध्यक्ष जफर बेग, महासचिव मलखान सिंह यादव, फतेहगंज पश्चिमी के चेयरमैन कुतुबुद्दीन, फतेहगंज कस्बे के निवासी और सपा नेता किशनपाल यादव, शीशगढ़ निवासी और मीरगंज से चुनाव लड़ चुके हाजी गुड्डू को शामिल किया गया था। रविवार को कमेटी सदस्य बरेली पहुंचे और जिला कार्यालय से फतेहगंज पश्चिमी के लिए रवाना हुए जिन्हें सीबीगंज में रोक लिया गया। पुलिस के ‘अनुरोध’ पर टीम मान गई। टीम को थाने ले जाया गया और वहां पर चाय पीने के बाद सभी वापस लौट गए। महानगर अध्यक्ष जफर बेग का कहना है कि एसपी देहात ने बताया कि कस्बे में शांति व्यवस्था कायम है तो हमने न जाना उचित समझा। वहीं कमेटी का गठन करने वाले जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव का कहना है कि पुलिस प्रशासन के अफसरों ने कहा कि दूसरी पार्टी के नेताओं को नहीं जाने दिया गया। सपा की टीम जाएगी तो लोगों को कहने का मौका मिल जाएगा। हमने पुलिस प्रशासन की बात मान ली और नहीं गए। फतेहगंज के ही नेताओं को ही वहां जाने से रोकने के सवाल पर एसपी देहात बृजेश श्रीवास्तव का कहना है कि पुलिस का मकसद किसी प्रतिनिधिमंडल को रोकना था। जो वहां के रहने वाले हैं उन्हें जाने से नहीं रोक सकते।
सपा की रिपोर्ट : गलती पुलिस की नहीं जेटली की
वीरपाल बोले, कोई मंदिर के पास कुछ डाल जाएगा तो पुलिस-प्रशासन कैसे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। फतेहगंज पश्चिमी मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराने के लिए सपा ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने बताया यह रिपोर्ट नगर पालिका चेयरमैन कुतुबुद्दीन और पार्टी नेता किशनलाल यादव की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। चूंकि धारा 144 लागू होने के कारण पुलिस प्रशासन ने किसी को जाने नहीं दिया इसलिए उन्हीं की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास भेजी जा रही है। रिपोर्ट में पुलिस-प्रशासन का पूरी तरह से बचाव किया गया है।
वहीं, वीरपाल सिंह यादव ने कहा कि सड़क किनारे मंदिर के सामने कोई कुछ डाल जाएगा तो उसकी जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की कैसे होगी। अफसर वहां पहरा लगाए तो बैठे नहीं हैं। पुलिस को जैसे ही जानकारी मिली अफसर मौके पर पहुंच गए। भाजपा वाले जांच से ध्यान भटकाने के लिए ड्रामा करने पर आमादा थे क्योंकि वह लाशों की राजनीति करते हैं। दूसरी बात, एसपी सिटी ने अजय जेटली को फोन नहीं किया था बल्कि जेटली ने ही उन्हें फोन करके कहा कि वह सहयोग करना चाहते हैं। इसलिए उन्हें बुला लिया। जब डीएम और एसएसपी वहां पहुंच गए तो जेटली को वहां रुकना नहीं चाहिए थे। वह अफसरों के काम में बाधा डालने लगे।
जेटली पिटाई प्रकरण
भाजपा ने प्रत्यावेदन दिया न शासन ने संज्ञान लिया...
बरेली। फतेहगंज प्रकरण में अजय जेटली की पिटाई को भाजपा ने मुख्य मुद्दा बनाकर पेश किया लेकिन अब यह प्रकरण सीन से गायब है। मुद्दा बना, बयानबाजी हुई, राजनीतिक जांच की गई लेकिन स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया गया। भाजपा ने प्रत्यावेदन दिया न शासन ने रिपोर्ट मांगी। हालांकि पार्टी ने मामले में मानवाधिकार आयोग को जरूर शिकायत की है। भाजपा के जिलाध्यक्ष राजकुमार का कहना है कि केवल जेटली की पिटाई ही नहीं बल्कि सभी भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न मुख्य मुद्दा है। अधिकारियों से मुलाकात की गई और उन्हें जानकारी दी गई। लिखित प्रत्यावेदन इसलिए नहीं दिया गया कि जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है और प्रदेश नेतृत्व जो फैसला करेगा उसके अनुसार हम आगे की रणनीति बनाएंगे। वहीं इस मामले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि न तो किसी ने लिखित शिकायत की है न ही शासन ने कोई रिपोर्ट मांगी है। शासन को फतेहगंज की स्थिति से रोजाना अवगत कराया जा रहा है। वहां की स्थिति सामान्य है।