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पांच हत्याओं से दहला बरेली

Wed, 14 Sep 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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सुच्चा ‌स‌िंह का घर जहां पांच कत्ल हुए
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शहर से 22 किलोमीटर दूर हाफिजगंज के तिगरा गांव में सिक्योरिटी गार्ड के पूरे परिवार की हत्या कर दी गई। पत्नी और तीन बच्चों को धारदार हथियारों से काटा गया जबकि सिक्योरिटी गार्ड सरदार सुच्चा सिंह की लाश घर से चार सौ मीटर दूर खेत में उसकी ही बाइक पर लटकी मिली। उसकी हत्या गोली मारकर की गई है। वारदात सोमवार रात 12 से दो बजे के बीच की मानी जा रही है। प्रथम दृष्टया पुलिस हत्याओं की वजह पारिवारिक कलह मान रही है। इस सनसनीखेज हत्याकांड से लखनऊ तक खलबली मच गई। मौके पर आईजी, जिलाधिकारी, एसएसपी देर तक डेला डाले रहे। तिगरा का 52 वर्षीय सुच्चा सिंह सिक्योरिटी गार्ड था और गांव में ही कच्ची शराब का धंधा भी करता था। उसकी पत्नी जसप्रीत कौर (42) घर के बाहर लकड़ी के  खोखे में परचून की दुकान चलाती थी। सड़क किनारे तीन कमरों के घर में अपने दो बेटों गुरदयाल (14), हरदयाल (12) और बेटी आशू (10) के साथ दोनों रह रहे थे। नीचे के कमरे में पति पत्नी और ऊपर के कमरे में तीनों बच्चे सोते थे। उसके पड़ोसी भाई हरनाम सिंह का कहना है कि सोमवार को रात करीब 12.30 बजे सुच्चा के घर से चीखने की आवाज आई लेकिन उनके घर से कोई नहीं निकला। भाई के घर में रहने वाली सुच्चा की मां बलवीर कौर ने बताया कि अक्सर सुच्चा के घर झगड़ा होता रहता था इसलिए ध्यान नहीं दिया। जब कुत्ता बार-बार बाहर जाकर कमरे में आने लगा तो बाहर जाकर देखा। सुच्चा के घर के बाहर खोखे के पास जसप्रीत कौर की लाश पड़ी थी। सुच्चा घर पर नहीं था। वह उनसे आए दिन झगड़ा और गाली गलौज करता था। इसलिए वह घर के अंदर नहीं गई और फोन से पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस तीन बजे के बाद घटनास्थल पर पहुंची और जसप्रीत का शव कब्जे में लिया। घर के कमरे से छत पर जाकर देखा तो दो बच्चों के शव चारपाई पर और बेटी का शव नीचे फर्श पर पड़ा था। चारों को किसी धारदार हथियार से नृशंसता से  काटा गया था। पुलिस पहले यही मान रही थी कि सुच्चा सिंह ने अपने परिवार का कत्ल किया है और फरार हो गया लेकिन सुबह आठ बजे घर से चार सौ मीटर दूर धान के खेत में सुच्चा सिंह की लाश बाइक पर लटकी मिली। हत्या के बाद हादसा दिखाने की कोशिश की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार गोली मारकर उसकी हत्या की गई है। गोली करीब से मारी गई जो आरपार हो गई। दिन भर पूरा गांव छावनी बना रहा। पुलिस अफसरों ने पूछताछ की लेकिन अब तक हत्याकांड की ठोस वजह सामने नहीं आई है।  
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट 
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सुच्चा सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। गोली पीछे से कमर के ऊपर लगी थी, जो तीसरी पसली तोड़कर आगे से होकर बाहर निकल गई। गोली लगने की जगह काला धब्बा था। यानी गोली सटाकर मारी गई थी। गोली के अलावा उसके शरीर पर अन्य कोई घाव नहीं था। सुच्चा सिंह का पेट खाली पाया गया। उसके पेट में अल्कोहल (शराब) के लक्षण भी नहीं मिले। उसकी जसप्रीत कौर गले पर 12-13 घाव पाए गए। उस पर किसी दरांती जैसे हथियार से हमला किया गया था। उनके गुरुदयाल व हरदयाल के हाथ की हड्डी कटी हुई और गले पर 10-11 घाव थे। बेटी आशु के गले पर आठ-नौ घाव थे। उन पर किसी धारदार हथियार से हमला किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मां और बच्चों को अलग-अलग हथियार से मारा गया था। जसप्रीत और बच्चों के पेट में खिचड़ी जैसा खाना पाया गया।
तो किसके लिए बनी थीं मछलियां
छानबीन के दौरान सुच्चा सिंह के घर कढ़ाई में मछली बनी रखी पाई गईं। अनुमान है कि रात को खाने में जसप्रीत ने मछली बनाई होंगी। पोस्टमार्टम के दौरान जसप्रीत और तीनों बच्चों के पेट में खिचड़ी पाई गई। सुच्चा सिंह ने कुछ खाया ही नहीं था। सवाल यह उठता है कि मछली बनी किसके लिए थीं? खुद के लिए बनाई थीं तो खाई क्यों नहीं गईं। बड़ा सवाल यह है कि कहीं पूरे परिवार को खाना खाने से पहले तो नहीं मार डाला गया।  
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घटनाक्रम
सोमवार शाम 5 बजे: सुच्चा सिंह, उसकी पत्नी और तीनों बच्चों को घर में उसकी मां ने आखिरी बार देखा। 
रात 12.30 से 1.00 बजे के बीच: छत पर बच्चों के चीखने की आवाज आई जो सुच्चा की मां ने सुनी। 
1.00 बजे : घर के बाहर पत्नी जसप्रीत कौर के चीखने की आवाज आई
रात 2.30 बजे सुच्चा की मां बलविंदर कौर ने एसओ के सीयूजी नंबर पर घटना की सूचना दी
3.30 बजे रात: सीओ और एसओ पुलिस फोर्स के साथ  घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद एसपी देहात और एसडीएम सदर पहुंचीं।   
मंगलवार सुबह 8 बजे: सुच्चा सिंह की लाश धान के खेत में मिली।
मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे: आईजी विजय सिंह मीना घटनास्थल पर पहुंचे। तुरंत बाद डीएम, एसएसपी भी पहुंचे। 
हत्याकांड के खुलासे को पांच टीमें बनी 
एसपी देहात यमुना प्रसाद ने बताया कि तिगरा में सुच्चा सिंह समेत उसकी पत्नी और तीन बच्चों की निर्मम तरीके से हुई हत्या के खुलासे के लिए पुलिस की चार टीमों के अलावा क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया है। एक टीम पीलीभीत के पुरनपुर में सुच्चा सिंह के बहनोई मेजर सिंह के घर भेजी गई है। 
पहले पत्नी की हत्या हुई या बच्चों की!
हत्यारों ने पहले सुच्चा सिंह की पत्नी की हत्या की या फिर छत पर चढ़कर बच्चों को मारा। इसका जवाब पुलिस को नहीं मिला। पुलिस ये मानकर चल रही है कि हत्यारे ने पहले नीचे जसप्रीत को मारा होगा। इसके बाद छत पर तीनों बच्चों को। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हत्यारों ने पहले बच्चों को मारा। इसके बाद जसप्रीत को मारने गए। तभी जसप्रीत कमरे से निकलकर जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागी। वहां पर उस पर धारदार हथियार से प्रहार किया गया। इसमें खोखे के पास लकड़ी की बेंच पर खरोंच के निशान थे। 
मां बोली गलत था बेटा
सुच्चा सिंह की मां बलविंदर कौर का कहना था कि उसका बेटा गलत था। वह कच्ची शराब बेचता था। गांव में शराब पीकर आधी रात के बाद तक घूमता था। मना करने पर उनसे गाली गलौज करता था। मौत से पहले शाम को भी उसने गाली गलौज की थी। वह कह रहा था कि तू (मां) घर में रहना है तो रह, नहीं तो निकल जा। उसका तालमेल किसी से नहीं था। सुच्चा की मां बलवीर कौर ने जो कहानी बताई, उससे पूरा मामला ही घरेलू झगड़े में उलझा लग रहा है। बलवीर कौर का कहना है कि शाम को सुच्चा ने पत्नी जसप्रीत कौर से कहा कि वह दूसरी शादी करेगा और सुंदर बीबी लाएगा। इसको लेकर उसकी पत्नी से काफी देर तक लड़ाई हुई। पांच बजे सुच्चा बाइक से कहीं चला गया। फिर रात में वह कब लौटा और कब क्या गया ये उसे कुछ नहीं पता।
सुच्चा के घर में ही छुपा है कत्ल का राज
देवर और बहनोई पर जसप्रीत ने दर्ज कराया था रेप का मुकदमा
कुछ दिन पहले ही पैसा लेने के बाद भी नहीं किया था समझौता
भाइयों के परिवार से बंद थी बोलचाल, नहीं था आनाजाना
एक ही परिवार में पांच लोगों की हत्या से हर कोई स्तब्ध है। पुलिस तो शुरुआती जांच में पति पत्नी के बीच का झगड़ा बता रही है लेकिन जांच की सुई कई और बिंदुओं पर घूम रही है जिसमें सबसे अहम है परिवार के बीच की रंजिश। आसपास ही रहने वाले भाइयों के परिवार से सुच्चा सिंह के परिवार की बोलचाल तक बंद थी। सुच्चा की पत्नी जसप्रीत ने देवर कश्मीर सिंह और बहनोई मेजर सिंह पर रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया जा रहा है कि इस मुकदमे में समझौते के लिए 1.20 लाख में समझौता हुआ लेकिन पूरा पैसा न मिलने पर कुछ समय पहले ही जसप्रीत ने समझौता करने से इंकार कर दिया था। सुच्चा की मां भी बेटे से तंग थी। कई बार उसने पुलिस में भी उसकी शिकायत की थी। हाल ही में एक अगस्त को उसने उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए थाने में तहरीर दी थी। सुच्चा सिंह का मकान गांव से आधा किलोमीटर बाहर सड़क के किनारे है। इसमें तीन कमरे हैं। अंदर के कमरे में घरेलू सामान भरा है। बाहर के कमरे में एक तख्त पड़ा है इस कमरे में पति और पत्नी रहते थे। सुच्चा सिंह की पत्नी घर के बाहर गुटखा और पान मसाला बेचती थी। इसकी आड़ में सुच्चा मटकापुर से कच्ची दारू लाकर बेचता था। वह झगड़ालू प्रवृत्ति का था। इससे सुच्चा की मां बलवीर कौर समेत उसके दोनों भाई कश्मीर सिंह और हरनाम सिंह भी परेशान रहते थे। अप्रैल माह में सुच्चा की पत्नी ने देवर कश्मीर सिंह और बहनोई मेजर सिंह पर बलात्कार का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुच्चा सिंह के करीबी रिश्तेदार के मुताबिक कुछ दिन पहले वकील के माध्यम से सुच्चा की पत्नी और देवर बहनोई के बीच मुकदमा वापस लेने को लेकर 1.20 लाख में समझौता कराने की कोशिश हुई। रेप के दोनों आरोपियों ने सुच्चा की पत्नी को मुकदमा वापस लेने के लिए समझौते में 1.20 लाख रुपये दे दिए। लेकिन इनमें आधे रुपये कोई दलाल बीच में खा गया। पूरे रुपये न मिलने पर सुच्चा की पत्नी ने समझौता करने से इनकार कर दिया। इस बात को लेकर दस दिन पहले सुच्चा और उसके बहनोई मेजर सिंह के बीच झगड़ा काफी बढ़ गया था। सुच्चा के बहनोई ने उसी समय जान से मारने की धमकी दी थी लेकिन बीच बचाव करके मामला शांत करा दिया गया। सुच्चा की मां बलवीर कौर भी रोज-रोज के झगड़े और मारपीट करने से बेटे और बहू से तंग थी। पांच महीने पहले सुच्चा ने गाली गलौज कर मां को घर से निकाल दिया था। मां बलवीर कौर पहले अपनी बड़ी बेटी के घर पूरनपुर रहंी। बाद में सुभाषनगर में रहने वाली छोटी बेटी के घर रहने के बाद घर वापस आ गईं। घर पहुंचने पर सुच्चा ने फिर मां से गाली गलौज की। इन वजहों से सुच्चा की अपने परिवार और दोनों बहन-बहनोई से बोलचाल बंद थी। पुलिस ने इस कड़ी को भी अपने तफ्तीश में शामिल किया है।
सुबह ही घर छोड़कर चला गया था कश्मीर 
घटना से 18 घंटे पहले सोमवार की सुबह करीब आठ बजे सुच्चा का मझला भाई कश्मीर सिंह  अपनी बड़ी बहन यहां पूरनपुर चला गया। सोमवार की रात दो बजे ये घटना हुई। बड़े भाई समेत उसकी पत्नी और तीन बच्चों की मौत की खबर उसे मंगलवार को दोपहर बाद तीन बजे तक पता नहीं चली। न तो कश्मीर सिंह अपने घर में दिखाई दिया और न ही उसके दोनों बहनोई। पुलिस ने जब मां बलवीर कौर से कश्मीर के बारे में पूछा तो मां का जवाब था कि उसे अभी तक घटना का पता नहीं है। मां ने जिस मोबाइल से पुलिस को फोन किया। उससे वह अपनी बेटी और बेटे को फोन नहीं कर पाई पुलिस को यह बात भी हैरत में डाल रही है। 
जान बचाने को बच्चों ने हाथ जोड़ा, वो भी काट दिया
सुच्चा सिंह की पत्नी और उसके तीनों बच्चे हत्यारों से अपनी जान बचाने के लिए आखिरी सांस तक जूझते रहे। जसप्रीत पर पहले हत्यारों ने कमरे के अंदर तलवार या किसी अन्य धारदार से हमला किया। चेहरे और गले में चोट खाने के बाद भी वह कमरे से निकलकर बाहर भागी। उसने हाथों से हमले का प्रहार रोका। बच्चों के हाथ भी कटे थे। ऐसा लग रहा था कि जब हत्यारे ने छत पर चढ़कर बड़े बेटे गुरदयाल पर धारदार हथियार से प्रहार किया तो वह चिल्लाया। इससे उसका छोटा भाई हरदयाल और बहन आशू भी जाग गई। दोनों चारपाई के दूसरी ओर लेटे हुए थे। दोनों ने खड़े होकर चेहरे के सामने हाथ आगे करके अपना बचाव करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। 
पत्नी और बच्चों के चीखने चिल्लाने पर अगर पड़ोस के घर में रह रहे हरनाम सिंह और उसकी पत्नी पिंकी अगर शोर मचा देती तो शायद हमलावर भाग जाते। इससे सुच्चा के बच्चों की जान बच सकती थी। सुच्चा के दूसरे भाई कश्मीर सिंह का घर उसके मकान के पीछे है। बच्चों के चिल्लाने की आवाज वहां तक भी पहुंची। कश्मीर घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इनके घर के पीछे ही पूरा गांव बसा है। घर में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। अगर बच्चों की चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर इनमें से कोई भी खेतों से पीछे की ओर भागकर गांव में आवाज लगा देता तो सुच्चा का पूरा परिवार खत्म नहीं होता। कम से कम बच्चों की जान जरूर बच जाती।  
बिखरी पड़ी बच्चों की किताबें 
सुच्चा सिंह का बड़ा बेटा गुरदयाल शांति देवी हायर सेकेंडरी स्कूल भड़सर में आठवीं क्लास में पढ़ता था। रिश्तेदारों के अनुसार घर में फीस की तंगी की वजह से वह कुछ दिन से स्कूल नहीं जा रहा था। उसकी बेटी आशू और छोटा बेटा हरदयाल डंडिया के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। नीचे वाले कमरे में तख्त पर छोटे बेटे हरदयाल और बेटी आशू की किताबें बिखरी पड़ी थीं। 
खून के धब्बों पर मिट्टी
नीचे वाले कमरे में पड़े तख्त के बगल में कुल्हाड़ी और दो गड़ासे पड़े थे। उन पर खून के धब्बों के निशान नहीं थे। खून के धब्बे छत के कमरे की चारपाई और फर्श पर और बाहर खोखे के पास मिले। खोखे के पास पड़े खून पर मिट्टी डालकर उसे ढक दिया गया। ये काम किसने किया। इस पर गौर नहीं किया गया। 
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